राजस्थान

राजस्थान में तबादलों पर सस्पेंस: राजस्थान: तबादलों का अंतिम दौर, सूचियों पर टिकी निगाहें

बलजीत सिंह शेखावत · 29 जून 2026, 10:24 दोपहर
तबादला अवधि खत्म होने में सिर्फ 7 दिन बचे, कृषि, राजस्व, पुलिस जैसे बड़े विभागों में अब तक सूची जारी नहीं।

जयपुर | राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों का दौर अंतिम चरण में पहुंच गया है, लेकिन अभी भी बेचैनी और इंतजार का माहौल है। तबादला अवधि शुरू हुए दस दिन बीत चुके हैं और अब केवल सात दिन शेष हैं, पर किसी भी बड़े विभाग ने बड़ी तबादला सूची जारी नहीं की है।

तबादला सूचियों में देरी से बढ़ी बेचैनी

सचिवालय से लेकर जिला मुख्यालयों तक, सभी कर्मचारियों की निगाहें अपने आदेशों पर टिकी हुई हैं। प्रशासनिक हलकों में यह माना जा रहा है कि अधिकांश विभाग अंतिम समय में ही एक साथ बड़ी सूचियां जारी करेंगे, जिससे दबाव और बढ़ गया है।

सूत्रों के अनुसार, कृषि, नगरीय विकास, राजस्व, पुलिस और पीडब्ल्यूडी जैसे प्रमुख विभागों में प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इन विभागों में बड़ी संख्या में तबादले होने की उम्मीद है।

हालांकि, नामों को जोड़ने और हटाने का सिलसिला अभी भी जारी है, जिसके कारण सूचियां जारी होने में लगातार देरी हो रही है। यह देरी कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता पैदा कर रही है।

सिफारिशों और राजनीतिक दबाव का दौर

तबादलों की प्रक्रिया में राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। कर्मचारी और उनके परिजन मनचाही पोस्टिंग के लिए मंत्रियों, विधायकों और अन्य प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों से संपर्क साध रहे हैं।

मंत्रियों और विधायकों के आवासों पर होने वाली जनसुनवाई में इन दिनों तबादलों की सिफारिश लेकर आने वालों की भीड़ सामान्य से कहीं अधिक है। हर कोई अपनी पहुंच का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है।

विभागों के भीतर यह भी चर्चा है कि कुछ प्रभावशाली लोग और अधिकारी ऊंचे स्तर पर अपनी पहुंच का दावा करते हुए तबादला कराने के 'ऑफर' दे रहे हैं।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों की अलग से निगरानी का कोई सिस्टम नहीं है, लेकिन शिकायत मिलने पर कार्रवाई जरूर की जाएगी।

कब लागू होगी स्थायी तबादला नीति?

हर साल होने वाली इस आपाधापी के बीच एक बार फिर राजस्थान में एक स्थायी और पारदर्शी तबादला नीति की मांग उठने लगी है। शिक्षा, पुलिस और राजस्व जैसे विभागों में यह समस्या सबसे गंभीर है।

एक ठोस नीति के अभाव में हर साल सिफारिशों और राजनीतिक दबाव का खेल चलता है, जिससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होता है, बल्कि विभागों के कामकाज पर भी असर पड़ता है।

अब देखना यह होगा कि सरकार इस दिशा में कब कोई ठोस कदम उठाती है ताकि हर साल होने वाली इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जा सके।

*Edit with Google AI Studio

← पूरा आर्टिकल पढ़ें (Full Version)