राजस्थान

जेल में सात फेरे: जेल में उम्रकैदी लेंगे सात फेरे, हाईकोर्ट का अनूठा आदेश

बलजीत सिंह शेखावत · 18 जुलाई 2026, 11:28 दोपहर
जोधपुर की खुली जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे दो कैदी शादी के बंधन में बंधेंगे। हाईकोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार माना।

जोधपुर | राजस्थान हाईकोर्ट के एक अनूठे आदेश के बाद जोधपुर के मंडोर स्थित ओपन एयर कैंप (खुली जेल) में जल्द ही एक उम्रकैद की सजा पाया जोड़ा सात फेरे लेगा। पति की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रही महिला बंदी, हत्या के ही एक अन्य दोषी पुरुष बंदी से विवाह करेगी।

हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दो बालिगों का आपसी सहमति से विवाह करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है।

न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायाधीश प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने इस महत्वपूर्ण मामले पर अपना निर्णय सुनाया।

दोषियों के पुनर्वास में मिलेगी मदद

कोर्ट ने यह भी माना कि इस तरह के विवाह से दोषियों के पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया भी मजबूत होती है।

क्या है पूरा मामला?

यह आदेश नागौर निवासी मूलाराम की अस्थायी सजा निलंबन याचिका का निस्तारण करते हुए दिया गया। मूलाराम 16 फरवरी 2017 से आजीवन कारावास की सजा काट रहा है और वर्तमान में मंडोर ओपन एयर कैंप में है।

मूलाराम की ओर से अधिवक्ता कालूराम भाटी ने अदालत को बताया कि वह सीमा गड़से गुलाब से विवाह करना चाहता है।

सीमा भी अपने पति की हत्या के मामले में दोषसिद्ध है और फिलहाल 40 दिन की पैरोल पर बाहर है।

याचिका में दी गई दलील

याचिका में कहा गया कि विवाह से दोनों के पुनर्वास और सुधार की प्रक्रिया को बल मिलेगा। इससे वे भविष्य में एक सामान्य पारिवारिक जीवन जी सकेंगे।

इसके समर्थन में राजस्थान हाईकोर्ट के एक पूर्व निर्णय का भी हवाला दिया गया, जिसमें बंदियों के वैवाहिक और संतानोत्पत्ति संबंधी अधिकारों को अनुच्छेद-21 के दायरे में माना गया था।

राज्य सरकार ने भी नहीं जताई आपत्ति

राज्य सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट में दोनों के विवाह की इच्छा और उनके बीच लिव-इन संबंध होने की पुष्टि की गई।

लोक अभियोजकों ने भी कहा कि जेल नियमों के तहत ओपन एयर कैंप में विधिसम्मत विवाह कराने पर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।

विवाह में शामिल होंगे 21 सदस्य

खंडपीठ ने निर्देश दिया कि विवाह समारोह में दोनों पक्षों के परिवारों के अधिकतम 21 सदस्य, विवाह संस्कार कराने वाले पंडित सहित, ओपन एयर कैंप में प्रवेश कर सकेंगे।

अतिथियों की संख्या बढ़ाने का अंतिम निर्णय कैंप प्रशासन करेगा। विवाह की तिथि की पूर्व सूचना देनी होगी और समारोह का पूरा खर्च मूलाराम स्वयं वहन करेगा।

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