राजस्थान

SI भर्ती 2021: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: SI भर्ती 2021: हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को दी बड़ी राहत

desk · 20 मई 2026, 01:49 दोपहर
राजस्थान हाईकोर्ट ने आरपीएससी को याचिकाकर्ताओं को परीक्षा में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।

जयपुर | राजस्थान हाईकोर्ट ने सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती-2021 की आगामी पुन: परीक्षा के संबंध में एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए उन्हें परीक्षा में शामिल करने का आदेश दिया है।

जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने बुधवार को आरपीएससी को स्पष्ट निर्देश जारी किए। कोर्ट ने कहा कि सभी याचिकाकर्ताओं को उनके आवेदन पत्र में सुधार का अवसर दिया जाए।

इसके बाद उन्हें प्रोविजनली परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए। यह आदेश उन अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी उम्मीद लेकर आया है जो पहले परीक्षा प्रक्रिया से बाहर हो रहे थे।

हाईकोर्ट का ऐतिहासिक अंतरिम आदेश

यह आदेश प्रश्नजीत सिंह, देवेंद्र सैनी, मधुसूदन शर्मा और अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया। याचिकाकर्ताओं ने आरपीएससी के उस फैसले को चुनौती दी थी।

आरपीएससी केवल सीमित अभ्यर्थियों को ही पुन: परीक्षा में मौका दे रहा था। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि उन्होंने मूल भर्ती के समय आवेदन किया था।

हालांकि, किसी व्यक्तिगत या अपरिहार्य कारणवश वे उस समय परीक्षा के दोनों प्रश्न पत्रों में शामिल नहीं हो पाए थे। अब जब आयोग पूरी भर्ती को रद्द कर चुका है, तो स्थिति बदल गई है।

आयोग अब दोबारा परीक्षा आयोजित कर रहा है, इसलिए पुराने सभी वैध आवेदकों को मौका मिलना चाहिए। यह न्याय के सिद्धांतों के अनुकूल है कि सभी योग्य आवेदकों को पुन: बैठने दिया जाए।

आरपीएससी की नीति पर उठे गंभीर सवाल

आयोग ने अपनी हालिया घोषणा में कहा था कि पुन: परीक्षा में केवल वही अभ्यर्थी बैठ पाएंगे, जिन्होंने मूल परीक्षा में दोनों पेपर दिए थे। याचिकाकर्ताओं ने इसे भेदभावपूर्ण करार दिया।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि यह नीति असंवैधानिक है। अदालत में दलील दी गई कि पूर्व में भी कई ऐसी भर्तियां हुई हैं जिन्हें विभिन्न कारणों से रद्द किया गया था।

उन सभी पिछले मामलों में, आयोग ने सभी मूल आवेदनकर्ताओं को फिर से परीक्षा देने का समान अवसर प्रदान किया था। एसआई भर्ती में इस परंपरा को तोड़ना गलत है।

आरपीएससी की दलील: 4 लाख आवेदनों का भारी बोझ

सुनवाई के दौरान आरपीएससी के प्रतिनिधियों ने अपनी व्यावहारिक कठिनाइयों को कोर्ट के सामने विस्तार से रखा। आयोग ने बताया कि मूल भर्ती में करीब 7.95 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।

आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इनमें से केवल 3 लाख 83 हजार अभ्यर्थी ही लिखित परीक्षा में शामिल हुए थे। बाकी के 4 लाख से अधिक अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे थे।

आरपीएससी ने तर्क दिया कि यदि सभी 4 लाख अभ्यर्थियों को फिर से अनुमति दी जाती है, तो डेटा प्रबंधन मुश्किल होगा। इन अभ्यर्थियों के पुराने दस्तावेजों की छंटनी करना जटिल कार्य है।

आयोग ने इसे एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण और समय लेने वाली प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर फॉर्म एडिट की अनुमति देना परीक्षा आयोजन में देरी कर सकता है।

तैयारी और अन्य नौकरियों का दिया हवाला

आयोग की ओर से यह भी दलील दी गई कि कई अभ्यर्थी अब तक अन्य सरकारी विभागों में नियुक्त हो चुके होंगे। कई अभ्यर्थियों ने संभवतः पुलिस भर्ती की तैयारी भी छोड़ दी होगी।

इसलिए उन्हें फिर से शामिल करना तार्किक नहीं लगता। हालांकि, कोर्ट ने आयोग की इन प्रशासनिक कठिनाइयों को अभ्यर्थियों के मौलिक और संवैधानिक अधिकारों से ऊपर नहीं माना।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें आवेदन एडिट करने की तत्काल सुविधा देने को कहा। इससे हजारों अभ्यर्थियों को फिर से अपनी किस्मत आजमाने का मौका मिलेगा।

समानता के अधिकार का महत्वपूर्ण मुद्दा

याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का पुरजोर हवाला दिया। उन्होंने कहा कि समान परिस्थितियों में अभ्यर्थियों के साथ अलग-अलग व्यवहार करना समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

"संविधान का अनुच्छेद 14 और 16 सभी नागरिकों को रोजगार के मामलों में समान अवसर की गारंटी देता है। किसी भी अभ्यर्थी को केवल तकनीकी आधार पर परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।"

वकीलों ने ईओ-आरओ भर्ती और एलडीसी भर्ती का उदाहरण भी अदालत में पेश किया। उन्होंने बताया कि उन भर्तियों में भी रद्द होने के बाद सभी आवेदनकर्ताओं को दोबारा मौका मिला था।

उन्होंने सवाल उठाया कि एसआई भर्ती-2021 के लिए अलग नियम क्यों बनाए जा रहे हैं? कोर्ट ने इन तर्कों को गंभीरता से लिया और याचिकाकर्ताओं के पक्ष में अंतरिम आदेश दिया।

8 मई का प्रेसनोट और विवाद की मुख्य जड़

इस पूरे विवाद की शुरुआत आरपीएससी द्वारा 8 मई को जारी किए गए एक प्रेसनोट से हुई थी। इस प्रेसनोट में आयोग ने बहुत ही संकुचित दृष्टिकोण अपनाया था।

आयोग ने केवल उन्हीं को आवेदन सुधार का मौका दिया था जिन्होंने पहले दोनों पेपर दिए थे। आयोग ने इसके लिए 16 से 30 मई तक की समयसीमा तय की थी।

याचिकाकर्ताओं ने इसे चुनौती देते हुए कहा कि यह निर्णय उन हजारों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। वे युवा लंबे समय से इस भर्ती के पुन: आयोजन की प्रतीक्षा कर रहे थे।

एसआई भर्ती-2021 का पूरा घटनाक्रम

एसआई भर्ती-2021 की पूरी प्रक्रिया शुरू से ही काफी विवादों और कानूनी अड़चनों में रही है। मूल रूप से यह परीक्षा सितंबर 2021 के बीच आयोजित की गई थी।

परीक्षा के बाद पेपर लीक और बड़े पैमाने पर धांधलियों के गंभीर आरोप लगे थे। राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को इस भर्ती को रद्द करने का फैसला सुनाया था।

इसके बाद मामला हाईकोर्ट की खंडपीठ तक पहुंचा था। खंडपीठ ने भी एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए भर्ती को रद्द करने के आदेश को सही ठहराया था।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था चयनितों का मामला

चयनित अभ्यर्थियों, जो वर्तमान में ट्रेनी एसआई के रूप में कार्यरत थे, ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी दलील थी कि वे निर्दोष हैं।

हालांकि, 4 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद भर्ती को दोबारा आयोजित करने का रास्ता साफ हुआ।

अब हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश ने उन अभ्यर्थियों के लिए नई उम्मीद जगाई है जो प्रारंभिक परीक्षा में नहीं बैठ पाए थे। यह कानूनी लड़ाई अब एक नए मोड़ पर है।

निष्कर्ष और भर्ती पर इसका प्रभाव

हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश से अब भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की कुल संख्या काफी बढ़ सकती है। यह उन युवाओं की जीत है जो न्याय की गुहार लगा रहे थे।

अब आरपीएससी को अपनी पूरी आवेदन प्रक्रिया और पोर्टल में तकनीकी बदलाव करने होंगे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रघुनंदन शर्मा और रामप्रताप सैनी ने प्रभावी पैरवी की थी।

निखिल कुमावत और रविंद्र सैनी ने भी कोर्ट में अभ्यर्थियों का पक्ष मजबूती से रखा। इस फैसले का असर प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं पर पड़ना तय माना जा रहा है।

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