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चुनाव में देरी पर कोर्ट सख्त: चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, जज नियुक्त करने की चेतावनी

बलजीत सिंह शेखावत · 17 जुलाई 2026, 10:32 दोपहर
राजस्थान हाई कोर्ट ने पंचायती राज चुनावों में देरी पर गहरी नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को फटकार लगाई है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर चुनाव नहीं कराए गए तो वह खुद जज नियुक्त कर चुनाव संपन्न कराएगा।

राजस्थान |

राजस्थान में पिछले कई महीनों से लंबित पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनावों को लेकर हाई कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। चुनाव कराने में हो रही लगातार देरी और प्रशासनिक ढिलाई पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है।

कोर्ट की सख्त चेतावनी

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है।

कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में यहां तक कहा कि यदि जिम्मेदार एजेंसियां समय पर चुनाव कराने में असमर्थ हैं, तो हाई कोर्ट अपने स्तर पर जज नियुक्त करके चुनाव संपन्न करवा देगा।

20 जुलाई तक रोडमैप पेश करने का आदेश

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ किया कि चुनाव टालने की प्रक्रिया अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को आगामी सोमवार (20 जुलाई 2026) तक चुनाव की तारीखों का रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया है।

इसके साथ ही, ओबीसी आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने और आरक्षण की लॉटरी निकालने के भी सख्त निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने सभी जिम्मेदार अधिकारियों को पूरी जानकारी के साथ सोमवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है।

सरकार की दलील खारिज

यह सुनवाई राज्य सरकार द्वारा दायर एक प्रार्थना पत्र पर हो रही थी। सरकार ने कोर्ट से 31 जुलाई 2026 तक चुनाव कराने के पिछले आदेश की समयसीमा बढ़ाने की गुहार लगाई थी।

सरकार ने दलील दी कि ओबीसी राजनीतिक आरक्षण संबंधी रिपोर्ट तैयार न होने के कारण इस समयसीमा में चुनाव कराना संभव नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने इस आग्रह को स्वीकार करने के बजाय अधिकारियों की क्लास लगा दी।

निर्वाचन आयुक्त ने मानी गलती

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने चुनाव में देरी को लेकर अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने बताया कि ईवीएम की उपलब्धता और मतदाता सूचियों सहित सभी तैयारियां 100% पूरी हैं।

उन्होंने देरी की वजह बताते हुए कहा कि पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग ने अब तक एससी, एसटी, ओबीसी और महिला आरक्षण से जुड़ी जानकारी नहीं दी है। इस डेटा के लिए 6 बार पत्र लिखने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला।

ओबीसी आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल

जब ओबीसी (राजनीतिक) आयोग के सचिव अशोक जैन से पूछा गया कि आयोग का गठन कितने समय के लिए हुआ था, तो उन्होंने बताया कि मई 2025 में सिर्फ 3 महीने के लिए। इस पर कोर्ट ने तीखी नाराजगी जताते हुए कहा कि जो काम 3 महीने में होना था, उसे एक साल से ज्यादा हो चुका है और अब तक चुनाव नहीं हो पाए हैं।

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