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राजस्थान

राजस्थान एचपीवी टीकाकरण: डीग अव्वल: राजस्थान में एचपीवी टीकाकरण की सुस्त रफ्तार, डीग सबसे आगे

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राजस्थान में एचपीवी टीकाकरण की रफ्तार धीमी, ढाई माह में केवल 16.60% लक्ष्य हुआ पूरा।

HIGHLIGHTS

  • राजस्थान में ढाई महीने के भीतर एचपीवी टीकाकरण का मात्र 16.60 फीसदी लक्ष्य ही हासिल हो पाया है।
  • डीग जिला 62.28 प्रतिशत कवरेज के साथ पूरे प्रदेश में प्रथम पायदान पर मजबूती से बना हुआ है।
  • करौली जिला 28.75 प्रतिशत टीकाकरण के साथ राजस्थान में सातवें स्थान पर अपनी जगह बनाए हुए है।
  • नागौर जिले में टीकाकरण की स्थिति सबसे कमजोर है, जहाँ केवल 5.23 प्रतिशत बालिकाओं को टीका लगा है।
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करौली | राजस्थान में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग का एचपीवी टीकाकरण अभियान गति नहीं पकड़ पा रहा है। पिछले ढाई महीनों में निर्धारित लक्ष्य का केवल 16.60 प्रतिशत ही पूरा हो सका है।

स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश की 8 लाख 32 हजार बालिकाओं को टीका लगाने का लक्ष्य रखा था। हालांकि, 13 मई तक की रिपोर्ट के अनुसार विभाग अभी अपने लक्ष्य से काफी दूर नजर आ रहा है।

टीकाकरण अभियान की वर्तमान स्थिति

राजस्थान में यह महत्वपूर्ण अभियान 28 फरवरी को अजमेर से शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य 14 से 15 वर्ष की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित करना है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में लगाया गया यह टीका भविष्य में गंभीर संक्रमणों से बचाने में सक्षम है। लेकिन जागरूकता की कमी के कारण अभियान की प्रगति अब भी काफी कमजोर बनी हुई है।

प्रदेश के कई जिलों में टीकाकरण की स्थिति चिंताजनक है। लगभग एक दर्जन से अधिक जिलों में टीकाकरण का आंकड़ा 10 प्रतिशत को भी पार नहीं कर पाया है, जो स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।

डीग जिला सबसे आगे, नागौर फिसड्डी

जिलों की प्रगति रिपोर्ट देखें तो डीग जिला 62.28 प्रतिशत कवरेज के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। यहाँ 13,855 के लक्ष्य के मुकाबले 8,629 बालिकाओं को टीका लगाया जा चुका है।

इसके विपरीत, नागौर जिले का प्रदर्शन सबसे निराशाजनक रहा है। नागौर में 17,764 बालिकाओं के लक्ष्य के मुकाबले महज 5.23 प्रतिशत टीकाकरण ही संभव हो पाया है, जो पूरे राज्य में सबसे कम आंकड़ा है।

अन्य जिलों में सिरोही 49.80 प्रतिशत के साथ दूसरे और भीलवाड़ा 39.50 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है। झालावाड़ और भरतपुर भी क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर अपनी जगह बनाए हुए हैं।

करौली जिले की प्रगति और चुनौतियां

करौली जिले ने टीकाकरण अभियान में संतोषजनक प्रदर्शन किया है। जिला 28.75 प्रतिशत प्रगति के साथ प्रदेश में सातवें स्थान पर है। यहाँ कुल 18,665 बालिकाओं को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित है।

अब तक जिले में 5,367 बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है। स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग के संयुक्त सहयोग से इस आंकड़े को और बेहतर बनाने के प्रयास निरंतर जारी हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रांतियों और जानकारी के अभाव के कारण लोग टीका लगवाने से हिचक रहे हैं। इसके समाधान के लिए अब विशेष ग्रामीण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

जागरूकता के अभाव में अपेक्षाकृत प्रगति नहीं है। वैसे करौली जिला प्रदेश में सातवें नम्बर पर है। अभियान में जिला प्रशासन के निर्देशन में शिक्षा विभाग का भी सहयोग लिया जा रहा है। - डॉ. सतीश चंद्र मीणा, कार्यवाहक सीएमएचओ

टीकाकरण का महत्व और सुरक्षा मानक

एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है। चिकित्सा संस्थानों और विद्यालयों में शिविर लगाकर बालिकाओं का टीकाकरण किया जा रहा है ताकि उन्हें भविष्य की बीमारियों से बचाया जा सके।

सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक घातक रोग है। समय पर टीकाकरण न केवल इस बीमारी को रोकता है, बल्कि अन्य एचपीवी जनित संक्रमणों के जोखिम को भी काफी हद तक कम कर देता है।

सरकार अब उन जिलों पर विशेष ध्यान दे रही है जहाँ प्रगति 10 प्रतिशत से कम है। इनमें सीकर, कोटा, टोंक, जयपुर और बाड़मेर जैसे महत्वपूर्ण जिले शामिल हैं जहाँ अभियान को गति देनी होगी।

शिक्षा विभाग के साथ समन्वय बढ़ाकर स्कूलों में टीकाकरण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। विभाग का लक्ष्य है कि आगामी समय में अधिक से अधिक बालिकाओं को कवर किया जा सके ताकि लक्ष्य प्राप्त हो।

निष्कर्ष के तौर पर, राजस्थान में एचपीवी टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए जन-भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। यदि जागरूकता बढ़ती है, तो प्रदेश जल्द ही सर्वाइकल कैंसर मुक्त होने की दिशा में तेज़ी से बढ़ेगा।

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