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राजस्थान का स्टार्टअप धमाका: राजस्थान में स्टार्टअप और AI क्रांति: मुख्य सचिव की बड़ी समीक्षा

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 30 अप्रैल 2026, 09:26 सुबह
मुख्य सचिव ने 'आईस्टार्ट' और 'स्मार्ट' प्रोजेक्ट्स की समीक्षा कर युवाओं के लिए नए अवसरों की राह खोली।

जयपुर | राजस्थान अब केवल किलों और महलों का प्रदेश नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और स्टार्टअप्स का नया केंद्र बन रहा है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने हाल ही में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की 'आईस्टार्ट' और 'स्मार्ट' पहलों की गहन समीक्षा कर विकास को नई दिशा दी है।

राजस्थान का भविष्य: तकनीक और नवाचार का संगम

सचिवालय में आयोजित इस बैठक में मुख्य सचिव ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भविष्य-उन्मुखी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि राजस्थान को एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी डेस्टिनेशन बनाना हमारा मुख्य लक्ष्य है।

मुख्य सचिव ने नवीकरणीय ऊर्जा, सौर प्रौद्योगिकी और एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों में हो रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने जोर दिया कि प्रदेश के युवाओं को इन उभरते क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए सरकार हर संभव मंच और सहायता उपलब्ध कराएगी।

ग्रामीण नवाचार और 'ऑरेंज इकोनॉमी' जैसे नए विषयों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान की सांस्कृतिक और रचनात्मक शक्ति को तकनीक के साथ जोड़कर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इससे प्रदेश की आर्थिक नींव और भी मजबूत होगी।

आईस्टार्ट: सपनों को हकीकत में बदलने का मंच

मुख्य सचिव ने 'आईस्टार्ट' पहल की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया, जो राजस्थान के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती दे रहा है। यह कार्यक्रम उद्यमियों को मेंटरशिप, इनक्यूबेशन सपोर्ट और मार्केट लिंकेज जैसी सुविधाएं एक ही छत के नीचे प्रदान कर रहा है।

उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स के लिए निवेशक कनेक्ट और पॉलिसी फेसिलिटेशन बहुत जरूरी है। सरकार चाहती है कि राजस्थान का हर युवा अपनी छोटी सी शुरुआत को एक बड़े उद्योग में बदलने का सपना देखे और उसे पूरा करने के लिए जरूरी संसाधन पाए।

बैठक में स्टार्टअप्स के लिए संस्थागत समर्थन का एक एकीकृत नेटवर्क विकसित करने पर बल दिया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि विभिन्न सरकारी विभागों और वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए ताकि स्टार्टअप्स को फंड की कमी न हो।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा, "हमें राजस्थान को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नवाचार के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है, ताकि यहां के युवा भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहें।"

स्मार्ट प्रोजेक्ट: जनता के लिए तकनीक का वरदान

मुख्य सचिव ने 'स्मार्ट' प्रोजेक्ट (Service Management with Artificial Intelligence and Real-Time System) की भी विस्तार से समीक्षा की। यह परियोजना सरकारी सेवाओं को सीधे जनता तक पहुंचाने का एक क्रांतिकारी कदम है, जिसमें तकनीक का बेहतरीन उपयोग किया गया है।

इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य विभिन्न सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान एआई के माध्यम से करना है। इससे लोगों को बिना किसी मैनुअल आवेदन के, सीधे उनके घर तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से मिल सकेगा, जो सुशासन की दिशा में बड़ा कदम है।

अधिकारियों ने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत अब तक कई महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल किए जा चुके हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इस प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और त्वरित बनाया जाए ताकि आम नागरिक को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

गांव-गांव तक पहुंचेगा डिजिटल नवाचार

मुख्य सचिव ने विशेष रूप से ग्रामीण नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नवाचार का लाभ केवल शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि राज्य के हर कोने के ग्रामीण उद्यमियों और स्टार्टअप्स तक इसकी पहुंच होनी चाहिए।

इसके लिए राज्यभर में नियमित कार्यशालाएं, इनोवेशन क्लिनिक और मेंटरिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को एआई, एमएल और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण और सहयोग प्रदान किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा।

बैठक में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के शासन सचिव डॉ. रवि कुमार सुरपुर और आयुक्त हिमांशु गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य सचिव ने अंत में कहा कि अब हमारा फोकस केवल शुरुआत करने पर नहीं, बल्कि इन पहलों को बड़े स्तर पर ले जाने पर है।

नवाचार-प्रधान विकास की यह सोच राजस्थान को आने वाले समय में देश का सबसे उन्नत और डिजिटल रूप से सशक्त राज्य बनाएगी। सरकार की इन कोशिशों से न केवल आर्थिक विकास होगा, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।

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