जयपुर | राजस्थान में जल जीवन मिशन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए मिशन निदेशक राजन विशाल ने सीकर जिले का दो दिवसीय दौरा किया। उन्होंने योजनाओं की प्रगति और गुणवत्ता की गहन समीक्षा की।
सीकर में जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत
मिशन निदेशक ने शुक्रवार और शनिवार को सीकर के विभिन्न ग्रामीण इलाकों का दौरा किया। उन्होंने झुन का बास, करणपुरा, सिहोट छोटी और लांपुवा (खंडेला) में चल रही जल योजनाओं का बारीकी से निरीक्षण किया।
दौरे के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्यों की गति बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। उन्होंने वितरण पाइपलाइन की ड्राइंग और डिजाइन की भी जानकारी ली।
मिशन निदेशक ने अमृत 2.0 योजना के तहत सीकर शहर के आनंद नगर में बन रहे उच्च जलाशय का भी जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्य को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने की हिदायत दी।
उन्होंने कहा कि पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए पाइपलाइन विस्तार और जल स्रोतों का विकास वैज्ञानिक तरीके से किया जाना चाहिए ताकि पानी की बर्बादी न हो।
अब हर गांव की होगी अपनी 'सुजलम आईडी'
राजन विशाल ने एक नई पहल की घोषणा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक गांव के लिए 'सुजलम आईडी' तैयार की जाए। यह आईडी जल योजनाओं के डिजिटल प्रबंधन में मील का पत्थर साबित होगी।
इस डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था से जल योजनाओं की मॉनिटरिंग और रखरखाव को मजबूती मिलेगी। सुजलम आईडी के जरिए योजना की तकनीकी जानकारी और पाइपलाइन नेटवर्क का पूरा डेटा एक ही जगह उपलब्ध रहेगा।
उन्होंने बताया कि इस आईडी में लाभान्वित परिवारों की संख्या, जल स्रोत की स्थिति और संचालन व्यवस्था का पूरा विवरण होगा। इससे किसी भी तकनीकी समस्या का समाधान तुरंत करना संभव हो सकेगा।
यह व्यवस्था न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगी बल्कि जवाबदेही भी तय करेगी। भविष्य में योजनाओं के विस्तार और मरम्मत कार्यों के लिए यह डेटाबेस बहुत उपयोगी साबित होगा।
गुणवत्ता और पारदर्शिता पर मिशन निदेशक का जोर
'जल जीवन मिशन केवल निर्माण कार्यों तक सीमित योजना नहीं है, बल्कि यह सामुदायिक सहभागिता आधारित एक बड़ा अभियान है, जिसे हमें सफल बनाना है।'
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कार्यस्थलों पर नियमित तकनीकी निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। गुणवत्ता मानकों का पालन करना अनिवार्य है।
राजन विशाल ने जोर देकर कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना ही इस मिशन का असली लक्ष्य है। इसके लिए अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहकर काम करना होगा।
सामुदायिक सहभागिता और 'हर घर जल' प्रमाणन
मिशन निदेशक ने ग्राम स्तर पर जल एवं स्वच्छता समितियों को सक्रिय करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक ग्रामीण समुदाय की भागीदारी नहीं होगी, योजनाएं टिकाऊ नहीं बन सकेंगी।
समितियों के माध्यम से जल संरक्षण और जिम्मेदारी की भावना विकसित की जाएगी। स्थानीय लोग ही अपने गांव की जल योजनाओं के रखरखाव और जल गुणवत्ता की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने 'हर घर जल' प्रमाणन प्रक्रिया में तेजी लाने के भी निर्देश दिए। जिन गांवों में हर घर तक नल कनेक्शन पहुंच चुका है, वहां जल्द से जल्द सत्यापन कार्य पूरा किया जाना चाहिए।
प्रमाणन केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीणों को बेहतर सेवाएं मिल रही हैं। उन्होंने सभी पात्र ग्रामों के शीघ्र सत्यापन के लिए समयसीमा तय की।
योजनाओं का स्थायित्व और भविष्य की राह
मिशन निदेशक ने कहा कि योजनाओं को दीर्घकाल तक टिकाऊ बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और जनसहभागिता का संगम आवश्यक है।
दौरे के अंत में उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक की। उन्होंने निर्देश दिए कि पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करते हुए राजस्थान को पेयजल क्षेत्र में अग्रणी बनाया जाए।
सीकर जिले में किए गए इस दौरे से जल जीवन मिशन के कार्यों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। सुजलम आईडी जैसी पहल से प्रदेश के अन्य जिलों को भी नई दिशा मिलेगी।
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