झुंझुनूं | इस्लामपुर गांव का नाम बदलने के विरोध में पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा सोमवार को ग्रामीणों के साथ करीब 22 किलोमीटर की पदयात्रा कर जिला मुख्यालय पहुंचे। कलक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन के दौरान तेज गर्मी और धूप के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे अचानक बेहोश होकर सड़क पर गिर पड़े।
प्रदर्शन के दौरान बिगड़ी तबीयत
सोमवार को गुढ़ा अपने समर्थकों और ग्रामीणों के साथ इस्लामपुर से झुंझुनूं कलक्ट्रेट तक पैदल मार्च पर निकले थे।
कलक्ट्रेट के बाहर जब वे प्रदर्शन कर रहे थे, तो तेज धूप और भीषण गर्मी के कारण वे अचानक बेहोश हो गए।
मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें तुरंत संभाला और पानी के छींटे मारकर होश में लाने की कोशिश की। पसीने से लथपथ गुढ़ा ने अस्पताल जाने से साफ इनकार कर दिया।
उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उन्हें धरनास्थल पर टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे प्रदर्शनकारियों के लिए छाया की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी।
गुढ़ा ने कहा, "जब उनके साथी धूप में बैठे हैं तो वे अकेले छांव में नहीं बैठ सकते।"
क्या है नाम बदलने का पूरा विवाद?
झुंझुनूं के इस्लामपुर गांव का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने का प्रस्ताव है, जिसका सर्व समाज पिछले पंद्रह दिनों से विरोध कर रहा है।
स्थानीय विधायक राजेंद्र भांबू ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति देते हुए मुख्यमंत्री को एक सिफारिशी पत्र भेजा था।
इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पर संज्ञान लेते हुए झुंझुनूं कलेक्टर को मामले की पूरी रिपोर्ट और फीडबैक भेजने के निर्देश दिए थे।
गांव का 400 साल पुराना इतिहास
ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि इस्लामपुर गांव की स्थापना वर्ष 1622 ईस्वी में हुई थी और तब से इसका यही नाम है।
गांव की आबादी लगभग 16 हजार है, जहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग दशकों से आपसी सद्भाव और भाईचारे के साथ रहते आए हैं।
सभी सरकारी रिकॉर्ड जैसे राजस्व रिकॉर्ड, पिन कोड, आधार कार्ड, पासपोर्ट और शैक्षणिक दस्तावेजों में गांव का नाम इस्लामपुर ही दर्ज है।
इस मांग को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल जयपुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित कई नेताओं से भी मिला था।
इस्लामपुर का नाम बदलने का यह मामला अब राजनीतिक रूप ले चुका है। एक तरफ जहां ग्रामीण और पूर्व मंत्री विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय विधायक की सिफारिश पर प्रशासन कार्रवाई कर रहा है। अब देखना यह है कि सरकार इस पर क्या अंतिम निर्णय लेती है।
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