जयपुर | मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विजन को धरातल पर उतारने के लिए राजस्थान सरकार सक्रिय है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों के साथ जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 की प्रगति की समीक्षा की।
समयबद्ध क्रियान्वयन और केंद्र की गाइडलाइन
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार से हिस्सेदारी राशि प्राप्त करने के लिए निर्धारित सभी घटकों को तय समय सीमा में पूरा करना अनिवार्य है। इसमें सुजलम आईडी निर्माण और सीआईआरपी कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, उन्हें एमआईएस पोर्टल पर तुरंत फाइनेंशियल क्लोज किया जाए। इससे डेटा प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी और फंड का सही उपयोग होगा।
हर घर जल और जनभागीदारी पर जोर
बैठक में “हर घर जल” सर्टिफिकेशन की धीमी प्रगति पर चिंता जताई गई। मुख्य सचिव ने जल सेवा आकलन की प्रक्रिया में तेजी लाने और सर्टिफिकेशन की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।
उन्होंने “जल अर्पण” जैसी गतिविधियों के माध्यम से जनभागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। इससे मिशन के उद्देश्यों को सामाजिक स्तर पर मजबूती मिलेगी और जनता में सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
जेजेएम 2.0 के अंतर्गत सुजलम आईडी और सीआईआरपी कार्यों को प्राथमिकता पर पूरा करें ताकि केंद्र से फंड समय पर मिल सके।
नल जल मित्र और तकनीकी सुदृढ़ीकरण
मुख्य सचिव ने जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (DWSM) की नियमित और गुणवत्तापूर्ण बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही जिला टेक्निकल यूनिट के अनुमोदन की प्रक्रिया को तेज करने को कहा।
पंचायती राज विभाग के सहयोग से “नल जल मित्र” का चयन किया जाएगा। इन मित्रों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि ग्रामीण स्तर पर जल प्रबंधन और रखरखाव प्रभावी ढंग से हो सके और योजना टिकाऊ बने।
इस समीक्षा बैठक का उद्देश्य राजस्थान में पेयजल आपूर्ति की स्थिति को सुधारना और केंद्र की योजनाओं का अधिकतम लाभ जनता तक पहुंचाना है। इससे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट दूर होगा और विकास को गति मिलेगी।
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