जयपुर |राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय और पंचायती राज चुनावों का बिगुल बजने से ठीक पहले, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीतियों को तेज कर दिया है। दोनों दलों ने सोमवार को अपने प्रदेश मुख्यालयों में मैराथन बैठकें कर उम्मीदवार चयन के लिए कड़े दिशा-निर्देश तय किए हैं, जिससे चुनावी समीकरण बदल गए हैं।
भाजपा की 'जिताऊ' और युवा रणनीति
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की अध्यक्षता में हुई भाजपा की उच्च स्तरीय बैठक में पार्टी का मुख्य नैरेटिव तय किया गया। इस बैठक में कई राष्ट्रीय पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
सिफारिश और भाई-भतीजावाद पर रोक
भाजपा ने स्पष्ट किया है कि प्रत्याशी चयन में किसी भी प्रकार का भाई-भतीजावाद, दबाव या पारिवारिक सिफारिश काम नहीं आएगी। टिकट का एकमात्र पैमाना उम्मीदवार का स्थानीय प्रभाव और चुनाव जीतने की क्षमता होगी।
जेन-जी और नए चेहरों को प्राथमिकता
पार्टी पहली बार निकाय चुनावों में जेन-जी (18 से 25 वर्ष के युवा) के बीच से सक्रिय युवाओं को सीधे चुनावी मैदान में उतारने की संभावनाओं पर काम कर रही है। चुनाव में सरकार के कामकाज और कांग्रेस के कथित कुशासन को मुख्य मुद्दा बनाया जाएगा।
कांग्रेस का 'स्थानीय उम्मीदवार' पर फोकस
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, एआईसीसी प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने जिलाध्यक्षों और अन्य नेताओं से फीडबैक लिया। डोटासरा ने कहा कि सरकार की नाकामियों को लेकर जनता के बीच जाएंगे।
बाहरी प्रत्याशियों की 'नो-एंट्री'
कांग्रेस ने एक बड़ा फैसला लेते हुए वार्ड स्तर पर बाहरी प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है। नियम के अनुसार, दावेदार जिस वार्ड का पंजीकृत मतदाता होगा, वह केवल उसी वार्ड से चुनाव लड़ सकेगा।
पारदर्शी चयन प्रक्रिया और राजनीतिक सफरनामा
कांग्रेस ने इस बार प्रत्याशी चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल मापदंड तय किए हैं। इच्छुक कार्यकर्ताओं को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से आवेदन करना होगा। आवेदन फॉर्म में उन्हें पार्टी में अपनी सक्रियता, पूर्व पदों और चुनावी अनुभव का पूरा ब्योरा देना होगा।
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