जयपुर | राजस्थान ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 'ज्ञान भारतम मिशन' के तहत राज्य में 16.66 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण पूरा किया गया है।
पांडुलिपि सर्वेक्षण में राजस्थान अव्वल
कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह जानकारी सामने आई कि राजस्थान इस मामले में देश में सबसे आगे है। राज्य के कला एवं संस्कृति विभाग ने विशेषज्ञों के साथ मिलकर यह व्यापक कार्य संपन्न किया है।
वेदों और पुराणों का अनमोल खजाना
इस सर्वेक्षण के दौरान विष्णु पुराण, पद्म पुराण, शिव पुराण और वेदों से संबंधित महत्वपूर्ण पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण किया गया है। इसमें रामायण, महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता की सदियों पुरानी प्रतियां भी शामिल हैं।
राज्य के विभिन्न जैन ज्ञान भंडारों में मौजूद प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ भारतीय ज्ञान परंपरा की अनूठी विरासत को प्रदर्शित करते हैं। इनके संरक्षण के लिए एशियाटिक सोसाइटी से भी सहयोग मांगा गया है।
"इन दस्तावेजों की प्रकृति के आधार पर सूची तैयार की जा रही है, जिससे शोधार्थियों को अध्ययन में काफी सुविधा होगी।" - मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास
डिजिटलीकरण पर रहेगा विशेष जोर
कैबिनेट सचिव ने निर्देश दिए हैं कि अगले चरण में इन पांडुलिपियों, विशेषकर जैन ग्रंथों और पुराणों की मेटाडेटा स्कैनिंग की जाए। इससे भारत की बौद्धिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षित रखा जा सकेगा।
यह पहल न केवल प्राचीन ज्ञान को सुरक्षित करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों और वैश्विक शोधकर्ताओं के लिए भारतीय दर्शन के द्वार भी खोलेगी। डिजिटलीकरण से इन ग्रंथों की पहुंच पूरी दुनिया तक आसान हो जाएगी।
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