राजस्थान

प्रसूताओं की मौत पर हड़कंप: राजस्थान में प्रसूताओं की मौत, स्वास्थ्य मंत्री ने बुलाई बैठक

बलजीत सिंह शेखावत · 14 जुलाई 2026, 10:48 दोपहर
राजस्थान में हाल ही में हुई प्रसूताओं की मौत पर स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने एनीमिया, हाई बीपी और पीपीएच को मौतों का मुख्य कारण बताया।

जयपुर |

राजस्थान के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में हाल के दिनों में प्रसूताओं की एक के बाद एक हुई मौतों के मामले ने राज्य सरकार और चिकित्सा विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सोमवार को जयपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की।

इस बैठक में प्रदेश के शीर्ष गायनोलॉजिस्ट विशेषज्ञ शामिल हुए, जिसमें स्थिति की गंभीरता पर चर्चा की गई।

मौतों के मुख्य कारण

बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जैसे जिलों में प्रसूताओं की असमय मृत्यु हुई।

उन्होंने इसके पीछे मुख्य रूप से एनीमिया (खून की कमी), हाई ब्लड प्रेशर, पीपीएच (प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव) और पोषण की भारी कमी जैसे गंभीर कारणों को जिम्मेदार ठहराया।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि ये सभी महिलाएं सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे अस्पतालों से गंभीर हालत में बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रेफर होकर आई थीं। डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद इन्हें नहीं बचाया जा सका।

मातृ मृत्यु दर में 25 प्रतिशत की कमी

स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने बैठक में पिछले कुछ वर्षों के आधिकारिक आंकड़े भी प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि राजस्थान में मातृ मृत्यु दर में लगातार गिरावट आ रही है।

आंकड़ों का विश्लेषण

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में राज्य में कुल 1094 प्रसूताओं की मृत्यु दर्ज की गई थी।

यह संख्या वर्ष 2024-25 में घटकर 986 तक पहुंच गई।

वर्ष 2025-26 के चालू आंकड़ों के अनुसार, यह संख्या और कम होकर 824 रह गई है।

इस प्रकार, वर्तमान सरकार के कार्यकाल में राज्य में मातृ मृत्यु के मामलों में लगभग 25 प्रतिशत की एक बड़ी और सकारात्मक कमी दर्ज की गई है।

पूर्ववर्ती सरकारों के हादसों का दिया हवाला

चिकित्सा मंत्री ने अतीत के कुछ बड़े चिकित्सा हादसों का भी संदर्भ दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में मात्र 3 दिन के भीतर 18 प्रसूताओं की मौत हो गई थी।

इसी प्रकार, वर्ष 2011-12 में जयपुर में भी 8 प्रसूताओं की एक के बाद एक मौत हुई थी।

मंत्री ने कहा कि वर्तमान में कोटा, बीकानेर या भीलवाड़ा में हुई घटनाओं का कोई एक समान पैटर्न या कारण नहीं है। ये सभी प्रसूताएं पहले से ही 'हाई रिस्क' श्रेणी की थीं। किसी को अत्यधिक एनीमिया था तो किसी का हाई बीपी के कारण लीवर और किडनी फेलियर जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

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