जयपुर | मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की घोषणाओं से राजस्थान की पारंपरिक माटी कला को नई पहचान मिली है। पिछले दो वर्षों में माटी कला बोर्ड को पिछले दस वर्षों से भी अधिक बजट मिला है, जिससे कलाकारों के लिए नए द्वार खुले हैं।
बिचून में बनेगा आधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
जयपुर के बिचून औद्योगिक क्षेत्र में जल्द ही 'माटी कला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' बनाया जाएगा। बोर्ड अध्यक्ष प्रहलाद राय टाक ने बताया कि यह केंद्र माटी कलाकारों के लिए आधुनिक तकनीक और रोजगार के नए अवसर लेकर आएगा।
इस केंद्र के माध्यम से कलाकारों को बाजार की मांग के अनुरूप नए डिजाइन सीखने का मौका मिलेगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कला को आधुनिकता से जोड़कर कलाकारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।
5000 विद्युत चाक और मशीनों का वितरण
बजट घोषणा के तहत प्रदेश भर के कुम्हारों को 5,000 विद्युत चालित चाक और मिट्टी गूंथने की मशीनें बांटी जाएंगी। इससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी और मिट्टी के उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
कौशल विकास के लिए इस वर्ष 100 प्रशिक्षक तैयार करने का लक्ष्य है। इन प्रशिक्षकों को राज्य के बाहर विशेष ट्रेनिंग दिलाई जाएगी, ताकि वे नई विधाएं सीखकर स्थानीय कलाकारों को प्रशिक्षित कर सकें।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से माटी कलाकारों के लिए आधुनिक तकनीक के माध्यम से नए रोजगार के द्वार खुलेंगे और उनकी कला को सम्मान मिलेगा।
कलाकारों के लिए आर्टिजन कार्ड की सुविधा
राज्य के सभी माटी कामगारों की पहचान के लिए विशेष 'आर्टिजन कार्ड' बनाए जाएंगे। इसके लिए बोर्ड द्वारा शिविर लगाए जाएंगे ताकि हर कलाकार को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का सीधा लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री ने 'माटी राजस्थान री' पुस्तक का विमोचन भी किया है। इसमें बोर्ड की उपलब्धियों का विवरण है। साथ ही, उत्कृष्ट कार्य करने वाले 45 कलाकारों को ‘माटी के लाल’ पुरस्कार से नवाजा गया है।
बाजार और प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रोत्साहन
माटी कलाकारों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति और स्कूटी योजना का प्रस्ताव भी भेजा गया है। उद्योग भवन में 'एक जिला-एक उत्पाद' वॉल पर माटी कला के उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा।
मिट्टी के बर्तनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मेलों और प्रदर्शनियों का आयोजन होगा। एमएसएमई पॉलिसी के माध्यम से इन कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि स्थानीय उत्पादों की मांग और बिक्री बढ़ सके।
राजस्थान सरकार के इन प्रयासों से माटी कला से जुड़े हजारों परिवारों के जीवन में समृद्धि आएगी। श्रीयादे माता का पैनोरमा बनाने के फैसले ने प्रजापत समाज में नई ऊर्जा और गर्व का संचार किया है।
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