अजमेर | राजस्थान अपनी ऐतिहासिक किलों और सुनहरे रेगिस्तान के लिए दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन आजकल एक और जगह सोशल मीडिया पर छाई हुई है। इसे लोग बड़े चाव से 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहते हैं। सफेद पहाड़ियां और नीली झीलें देखकर हर कोई यहां खिंचा चला आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस जगह को आप जन्नत समझ रहे हैं, वह वास्तव में एक 'टॉक्सिक' यानी जहरीली जगह है? किशनगढ़ का यह मार्बल डंपिंग यार्ड आज एक बड़ा टूरिस्ट स्पॉट बन चुका है, पर इसके पीछे का सच डराने वाला है।
क्यों कहा जाता है इसे 'मिनी स्विट्जरलैंड'?
अजमेर जिले के किशनगढ़ को भारत की 'मार्बल सिटी' कहा जाता है। यहां मार्बल काटने और पॉलिश करने की हजारों इकाइयां हैं। मार्बल की कटाई के दौरान निकलने वाले बारीक पाउडर (स्लरी) को पानी के साथ मिलाकर टैंकरों के जरिए इस डंपिंग यार्ड में डाला जाता है। वक्त के साथ जब पानी सूखता है, तो यह पाउडर सफेद टीलों और पहाड़ियों का रूप ले लेता है, जो दूर से बर्फ की तरह दिखते हैं। बीच-बीच में जमा पानी नीली झीलों का अहसास कराता है। यही वजह है कि लोग इसे स्विट्जरलैंड जैसा खूबसूरत सफेद इलाका मानने लगे हैं।
सोशल मीडिया और फिल्मों का बढ़ता क्रेज
1980-90 के दशक में यह सिर्फ कचरा डालने की जगह थी, लेकिन 2005 के बाद किशनगढ़ मार्बल एसोसिएशन ने इसे व्यवस्थित किया। यहां कई बड़ी फिल्मों और म्यूजिक वीडियो की शूटिंग हुई, जिससे इसकी लोकप्रियता रातों-रात इंटरनेट पर बढ़ गई। अब यहां रोजाना 5,000 से ज्यादा पर्यटक आते हैं। छुट्टियों के दिनों में यह संख्या 20,000 तक पहुंच जाती है। लोग यहां प्री-वेडिंग शूट और इंस्टाग्राम रील्स बनाने के लिए दूर-दूर से आते हैं, पर वे इसके छिपे हुए खतरे से पूरी तरह अनजान हैं।
सेहत के लिए बड़ा खतरा: 'टॉक्सिक डेस्टिनेशन'
राजस्थान सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एक हालिया अध्ययन ने इस जगह को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों ने इसे आधिकारिक तौर पर "टॉक्सिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन" कहा है। यहां की हवा और पानी दोनों ही जहरीले हो चुके हैं। मार्बल का बारीक सूखा पाउडर हवा में उड़कर सीधे फेफड़ों तक पहुंचता है, जिससे सांस लेने में गंभीर दिक्कत होती है। लंबे समय तक यहां रहने या बार-बार आने से सिलिकोसिस, अस्थमा और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां होने का खतरा बना रहता है।
पानी और मिट्टी पर पड़ रहा बुरा असर
अध्ययन के अनुसार, इस यार्ड के 6 किलोमीटर के दायरे में भूजल पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है। यहां पानी का टीडीएस (TDS) लेवल सामान्य से 10 गुना ज्यादा पाया गया है, जो इंसानी शरीर के लिए जहर के समान है। पानी में भारी धातुओं और फ्लोराइड की मात्रा भी बहुत अधिक है, जो हड्डियों और दांतों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाती है। आसपास के गांवों की जमीन बंजर हो रही है। मिट्टी की उर्वरता खत्म होने से स्थानीय किसानों की फसलें भी प्रभावित हो रही हैं।
एशिया का सबसे बड़ा मार्बल वेस्ट डंपिंग यार्ड
यह यार्ड लगभग 200 से 350 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे एशिया का सबसे बड़ा मार्बल वेस्ट डंपिंग यार्ड माना जाता है। रोजाना 700 से ज्यादा टैंकर यहां 22 लाख लीटर से ज्यादा स्लरी डालते हैं, जो पर्यावरण के लिए एक बड़ी चुनौती है। प्रशासन और विशेषज्ञों का कहना है कि बिना सुरक्षा मानकों के यहां घूमना भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को न्योता देना है।
पर्यटकों के लिए जरूरी सावधानी
अगर आप फिर भी यहां जाने का मन बना रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। बिना मास्क पहने इस इलाके में बिल्कुल न जाएं। बारीक धूल के कण अदृश्य होकर आपके श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यहां की झीलों के पानी में उतरने की गलती कभी न करें, क्योंकि इसमें भारी मात्रा में केमिकल्स और कैल्शियम कार्बोनेट होता है। सांस के मरीजों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को इस जगह से दूर रखना ही बेहतर है। खूबसूरती के चक्कर में अपनी सेहत से समझौता न करें।