जयपुर | राजस्थान में खनन क्षेत्र को पूरी तरह से पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाया है। राज्य में अब ऑटोमाइज्ड अधीकृत तुलाई कांटों का लाइव परीक्षण शुरू हो गया है। इससे अवैध खनन पर लगाम लगेगी और राजस्व की चोरी रुकेगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव खान एवं पेट्रोलियम श्रीमती अपर्णा अरोड़ा ने जयपुर के उगरियावास में एडप्ट इंफ्रा के तुलाई कांटे से इस व्यवस्था का औपचारिक शुभारंभ किया।
राजस्थान में खनन होगा हाईटेक: राजस्थान में खनन क्षेत्र का कायाकल्प: ऑटोमाइज्ड तुलाई कांटों का लाइव परीक्षण शुरू, पारदर्शिता के साथ बढ़ेगा राजस्व
राजस्थान सरकार ने खनन क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए ऑटोमाइज्ड तुलाई कांटों का लाइव परीक्षण शुरू कर दिया है। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और लीजधारकों को काफी सुविधा मिलेगी।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान के खनन क्षेत्र में ऑटोमाइज्ड तुलाई कांटों का लाइव परीक्षण जयपुर के उगरियावास से शुरू हुआ।
- पहले चरण में 309 में से 130 कांटों पर परीक्षण शुरू, शेष 179 कांटों को 20 अप्रैल तक जोड़ा जाएगा।
- खान विभाग जल्द ही खान धारकों और विभागीय उपयोग के लिए एक आधुनिक मोबाइल एप्प लॉन्च करेगा।
- दूसरे चरण में 1019 और तुलाई कांटों को ऑटोमाइज्ड करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे व्यवस्था पेपरलेस होगी।
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मोबाइल एप्प से होगी निगरानी
श्रीमती अरोड़ा ने जानकारी दी कि विभाग जल्द ही खान धारकों के लिए एक विशेष मोबाइल एप्प भी जारी करने जा रहा है। यह एप्प काफी मददगार होगा। यह एप्प विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ लीजधारकों के लिए भी उपलब्ध होगा। इससे वे अपनी गतिविधियों और तुलाई की रियल-टाइम निगरानी कर सकेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे फील्ड में जाकर नियमित मॉनिटरिंग करें। खानधारकों से सीधा संवाद कर उनका फीडबैक लेना भी सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री का विजन: पेपरलेस व्यवस्था
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशन में खान विभाग अब पूरी तरह से पेपरलेस और पारदर्शी व्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इस नई ऑटोमाइज्ड व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि लीजधारकों के लिए दैनिक कामकाज करना भी काफी सुगम और तनावमुक्त हो जाएगा। विभाग का मानना है कि यह तकनीक लीजधारकों और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। इससे विभाग की मॉनिटरिंग क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
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लक्ष्य और वर्तमान प्रगति
नई व्यवस्था के प्रभावी होते ही अब तक 10 हजार से अधिक ई-रवन्ना जारी किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा व्यवस्था की सफलता को दर्शाता है। पहले चरण के लिए कुल 309 तुलाई कांटों का चयन किया गया है। इनमें से 130 पर लाइव परीक्षण सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि बाकी बचे 179 तुलाई कांटों को आगामी 20 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से इस ऑटोमाइज्ड सिस्टम से जोड़ दिया जाएगा।
दूसरे चरण की बड़ी योजना
विभाग ने दूसरे चरण की रूपरेखा भी तैयार कर ली है। इसमें 1019 और तुलाई कांटों को ऑटोमाइज्ड मोड पर लाने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। स्थानीय स्तर पर कार्य में तेजी लाने के लिए फील्ड अधिकारियों को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। वे तकनीकी समस्याओं का समाधान करेंगे। जयपुर के अधिकारियों का मानना है कि वीटीएस व्यवस्था और ऑटोमाइजेशन से खनन क्षेत्र की पूरी छवि बदल जाएगी और यह निवेश के अनुकूल बनेगा।
अधिकारियों के साथ संवाद
इस अवसर पर एसीएस ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से फील्ड अधिकारियों से संवाद किया। उन्होंने आईटी टीम को तकनीक को और सरल बनाने के निर्देश दिए। खान निदेशक महावीर प्रसाद मीणा ने आश्वस्त किया कि तय समय सीमा के भीतर सभी लक्ष्यों को पूरा कर लिया जाएगा ताकि खनिज संपदा का सदुपयोग हो।
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