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राजस्थान खनन में हाई-टेक बदलाव: राजस्थान के खनन क्षेत्र में बड़ी क्रांति: 8 अप्रैल से तुलाई कांटों का लाइव टेस्ट और व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम शुरू

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

राजस्थान सरकार खनन क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए 8 अप्रैल से ऑटोमाइज्ड तुलाई कांटों का लाइव परीक्षण शुरू करेगी। इसके साथ ही खनिज परिवहन वाहनों को व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा।

HIGHLIGHTS

  • 8 अप्रैल से राजस्थान के खनन क्षेत्र में ऑटोमाइज्ड तुलाई कांटों का लाइव परीक्षण शुरू होगा।
  • खनिज परिवहन वाहनों को अब जीपीएस और व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (VTS) से अनिवार्य रूप से जोड़ा जाएगा।
  • अगस्त तक पूरे राज्य में तुलाई कांटों और वाहनों के ऑटोमाइजेशन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • इस नई व्यवस्था से खनन क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी और सरकारी राजस्व की चोरी पर लगाम लगेगी।
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जयपुर | राजस्थान के खनन क्षेत्र में अब एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने खनन क्षेत्र को पूरी तरह हाई-टेक बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती अपर्णा अरोरा ने घोषणा की है कि 8 अप्रैल से ऑटोमाइज्ड तुलाई कांटों का लाइव परीक्षण शुरू किया जाएगा। यह कदम खनन क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है।

डिजिटल तकनीक से लैस होगा खनन क्षेत्र

सरकार ने माइनिंग सेक्टर में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (RFID) लागू करने का फैसला किया है। इससे खानधारकों और सरकार दोनों को बड़े स्तर पर फायदा होगा। पहले चरण में वे-ब्रिज ऑटोमाइजेशन का काम शुरू किया गया है। इसके साथ ही खनिज ढोने वाले वाहनों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (VTS) भी लगाया जा रहा है।

क्या है सरकार की बड़ी योजना?

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि यह कार्य राज्य सरकार के 'उन्नति' कार्यक्रम का हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। अगस्त महीने तक राज्य के सभी तुलाई कांटों और परिवहन वाहनों को इस सिस्टम से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए फील्ड अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है।

8 अप्रैल को होगा लाइव परीक्षण

आगामी 8 अप्रैल का दिन राजस्थान के खनन विभाग के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। इस दिन वीटीएस और जीपीएस सिस्टम का पहला ट्रायल रन किया जाएगा। इसी दिन विभाग के खनिज अभियंताओं और सहायक अभियंताओं के लिए एक खास ओरिएंटेशन प्रोग्राम भी रखा गया है। ताकि वे इस नई तकनीक को बारीकी से समझ सकें।

पारदर्शिता और राजस्व में सुधार

इस ऑटोमाइजेशन सिस्टम के लागू होने से माइनिंग सेक्टर में होने वाली धांधली पर रोक लगेगी। व्यवस्था के सरलीकरण से खानधारकों को काम करने में आसानी होगी। सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि राज्य सरकार के राजस्व में होने वाली चोरी या छीजत पूरी तरह से रुक जाएगी। इससे सरकारी खजाने में अधिक पैसा जमा हो सकेगा।

फील्ड अधिकारियों की बढ़ी जिम्मेदारी

अधीक्षण खनिज अभियंता जयपुर एनएस शक्तावत ने जानकारी दी कि जयपुर क्षेत्र में चयनित तुलाई कांटों का लाइव प्रदर्शन किया जाएगा। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। अतिरिक्त निदेशक महेश माथुर को इस पूरे प्रोजेक्ट का नोडल अधिकारी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि फील्ड अधिकारियों को सहायक नोडल अधिकारी के रूप में तैनात किया गया है।

छुट्टियों में भी जारी रहेगा काम

प्रोजेक्ट की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने निर्देश दिए हैं कि अवकाश के दिनों में भी ऑटोमाइजेशन का काम बंद नहीं होगा। समय सीमा के भीतर काम पूरा करना अनिवार्य है। इस पूरी योजना की मॉनिटरिंग मुख्यालय स्तर से की जा रही है। हाल ही में हुई हाइब्रिड बैठक में निदेशक महावीर प्रसाद मीणा और अन्य उच्च अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

भविष्य की राह हुई आसान

राजस्थान सरकार का यह कदम खनन क्षेत्र में भ्रष्टाचार मिटाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। तकनीक के उपयोग से काम की गति भी तेज होगी। आने वाले समय में राजस्थान का माइनिंग मॉडल पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकता है। इससे निवेशकों का भरोसा भी राज्य के खनन क्षेत्र में बढ़ेगा।

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