जयपुर | राजस्थान के खनन क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। माइंस विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती अपर्णा अरोरा ने अधिकारियों को प्रोएक्टिव रोल निभाने को कहा है।
उनका स्पष्ट मानना है कि फील्ड स्तर पर सक्रियता बढ़ाकर ही राज्य के राजस्व में वृद्धि की जा सकती है। इससे न केवल सरकारी खजाना भरेगा बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
प्री-एम्बेडेड ब्लॉक्स पर रहेगा विशेष फोकस
एसीएस अपर्णा अरोरा ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान ने पिछले वित्तीय वर्ष में 8 प्री-एम्बेडेड मेजर मिनरल ब्लॉकों की सफल नीलामी की थी।
इस उपलब्धि ने राजस्थान को देशभर में अग्रणी बना दिया है। इस साल की कार्ययोजना के तहत विभाग ने 10 मेजर और लगभग 100 माइनर मिनरल प्लॉट तैयार कर नीलामी करने का लक्ष्य रखा है।
प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों की खासियत यह है कि इनमें सभी आवश्यक अनुमतियां पहले से ही प्राप्त होती हैं। इससे सफल बोलीदाता नीलामी के तुरंत बाद बिना किसी देरी के खनन कार्य शुरू कर सकता है।
विभाग ने मेजर और माइनर ब्लॉकों की नीलामी के लिए एक मासिक रोडमैप तैयार किया है। यह पहली बार है जब अप्रैल में ही 9 मिनरल ब्लॉकों की नीलामी की प्रक्रिया पूरी की गई है।
बंद खदानों को फिर से शुरू करने के निर्देश
श्रीमती अरोरा ने अधीक्षण खनिज अभियंताओं को कड़े निर्देश दिए कि राज्य में जो खानें बंद पड़ी हैं, उन्हें तुरंत शुरू किया जाए। उन्होंने लीज धारकों के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया है।
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट कहा कि खनन कार्य में आने वाली किसी भी प्रकार की तकनीकी या कानूनी बाधा को प्राथमिकता के आधार पर दूर करें ताकि उत्पादन और राजस्व में कोई कमी न आए।
"लीज धारकों के साथ संवाद स्थापित करें और खनन कार्य शुरू करने में आ रही व्यावहारिक समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित करें ताकि राजस्व की हानि रोकी जा सके।"
उन्होंने फील्ड अधिकारियों को एक महीने के भीतर सभी पेंडिंग एग्रीमेंट पूरे करने के निर्देश दिए। जिन खानों को पर्यावरणीय स्वीकृति मिल चुकी है, वहां 15 दिनों के भीतर काम शुरू होना चाहिए।
प्रशासनिक सुधार और राजस्व की सुरक्षा
बैठक में विभाग के मानव संसाधन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों जैसे पदोन्नति और वरिष्ठता सूची के निस्तारण पर भी चर्चा हुई। संयुक्त सचिव अरविन्द सारस्वत ने बताया कि तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
विशिष्ट सचिव श्रीमती नम्रता व्रष्णि ने राजस्व चोरी रोकने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लीज धारकों द्वारा जारी किए जाने वाले रवन्नाओं की नियमित जांच बेहद आवश्यक है।
निदेशक महावीर प्रसाद मीणा ने आश्वासन दिया कि विभागीय निगरानी तंत्र को और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। इससे अवैध खनन पर लगाम लगेगी और विभाग की कार्यक्षमता में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।
यह नई रणनीति राजस्थान के आर्थिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है। राज्य सरकार की इन कोशिशों से न केवल उद्योग जगत को लाभ होगा, बल्कि आम जनता के लिए समृद्धि के द्वार खुलेंगे।
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