thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राजस्थान

खनन क्षेत्र में डिजिटल क्रांति: राजस्थान खनन क्षेत्र में बड़ा बदलाव: 8 अप्रैल से शुरू होगा ऑटोमाइज्ड तुलाई कांटों का लाइव परीक्षण, आरएफआईडी और वीटीएस से बढ़ेगी पारदर्शिता

मानवेन्द्र जैतावत

राजस्थान के खनन विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए 8 अप्रैल से ऑटोमाइज्ड तुलाई कांटों का लाइव परीक्षण शुरू होगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोरा ने खनिज परिवहन वाहनों को व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (VTS) से जोड़ने और आरएफआईडी तकनीक लागू करने के निर्देश दिए हैं।

HIGHLIGHTS

  • 8 अप्रैल को ऑटोमाइज्ड तुलाई कांटों का लाइव परीक्षण और विभागीय अधिकारियों का ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित होगा।
  • खनिज परिवहन वाहनों को व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) और जीपीएस से अनिवार्य रूप से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू।
  • आरएफआईडी तकनीक के माध्यम से खनन क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी और राज्य सरकार के राजस्व की चोरी रुकेगी।
  • अगस्त 2024 तक राज्य के सभी तुलाई कांटों और परिवहन वाहनों के ऑटोमाइजेशन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
rajasthan mining sector automated weighbridge live testing rfid vts

जयपुर | राजस्थान सरकार ने खनन क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और राजस्व की छीजत रोकने के लिए एक बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। राज्य के खनन क्षेत्र में आगामी 8 अप्रेल से ऑटोमाइज्ड अधीकृत तुलाई कांटों का लाइव परीक्षण शुरू किया जा रहा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव, माइंस एवं पेट्रोलियम, श्रीमती अपर्णा अरोरा ने बताया कि राज्य के खानधारकों और सरकार के व्यापक हितों को देखते हुए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (आरएफआईडी) लागू करने का निर्णय लिया गया है।

डिजिटल तकनीक से सुधरेगी व्यवस्था

विभाग द्वारा पहले चरण में वे-ब्रिज ऑटोमाइजेशन और जीपीएस-आरएफआईडी आधारित व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) के मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। इससे खनिज परिवहन की निगरानी अब और अधिक सटीक और प्रभावी हो सकेगी। श्रीमती अरोरा ने फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अवकाश के दिनों में भी ऑटोमाइजेशन का कार्य जारी रखें। इस कार्य को सरकार के 'उन्नति' कार्यक्रम में शामिल किया गया है, जो इसकी प्रशासनिक महत्ता को दर्शाता है।

अगस्त तक पूरा होगा लक्ष्य

प्रशासन ने अगस्त माह तक राज्य के सभी तुलाई कांटों और खनिज परिवहन वाहनों के शत-प्रतिशत ऑटोमाइजेशन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए प्रभावी मॉनिटरिंग और समयबद्ध कार्य प्रणाली अपनाई जा रही है। फील्ड स्तर पर इस कार्य को सुचारू बनाने के लिए सहायक नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं। ये अधिकारी मॉड्यूल इंस्टालेशन और लाइव टेस्टिंग की प्रक्रिया पर सीधी नजर रखेंगे और तकनीकी बाधाओं को दूर करेंगे।

8 अप्रैल: परीक्षण और ओरिएंटेशन

आरएफआईडी योजना के क्रियान्वयन के लिए 8 अप्रैल की तिथि अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन वीटीएस और जीपीएस सिस्टम का ट्रायल रन किया जाएगा। साथ ही, खनिज अभियंता और सहायक खनिज अभियंताओं का विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम भी होगा। इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम के माध्यम से अधिकारियों को नई तकनीक के उपयोग और उसकी बारीकियों के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे तकनीकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान संभव हो सकेगा और कार्य में गति आएगी।

पारदर्शिता और राजस्व सुरक्षा

तुलाई कांटों के ऑटोमाइजेशन से माइनिंग सेक्टर में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे खानधारकों को व्यापार करने में सुगमता होगी और पूरी व्यवस्था का सरलीकरण संभव हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार के राजस्व में होने वाली चोरी पर भी प्रभावी रोक लगेगी। डिजिटल ट्रैकिंग के कारण अवैध खनन और अवैध परिवहन की गतिविधियों पर लगाम लगाना अब पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा।

अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी

अधीक्षण खनिज अभियंता जयपुर, श्री एनएस शक्तावत ने जानकारी दी कि अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वयं चयनित तुलाई कांटों के ऑटोमाइजेशन कार्य को लाइव करेंगी। इसके साथ ही पूरे राज्य में ऑटोमाइज्ड कांटों का प्रदर्शन शुरू होगा। अतिरिक्त निदेशक मुख्यालय, श्री महेश माथुर को आरएफआईडी का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्होंने सभी खनिज अभियंताओं को तय समय सीमा के भीतर ऑटोमाइजेशन का कार्य पूरा करने की सख्त हिदायत दी है।

उच्च स्तरीय बैठक में चर्चा

हाल ही में आयोजित हाइब्रिड बैठक में निदेशक माइंस श्री महावीर प्रसाद मीणा और संयुक्त सचिव श्री अरविन्द सारस्वत ने हिस्सा लिया। बैठक में तकनीक के सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषाधिकारी श्री श्रीकृष्ण शर्मा और अतिरिक्त निदेशक आईटी श्रीमती शीतल अग्रवाल ने भी तकनीक के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। विभाग का मानना है कि यह कदम राजस्थान के खनन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

शेयर करें:

ताज़ा खबरें