जयपुर | राजस्थान के खनन क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और अवैध परिवहन पर लगाम लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत की गई है। जयपुर संभाग में खनिज परिवहन करने वाले हजारों वाहनों में अब अत्याधुनिक व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम यानी वीटीएस लगाया जा रहा है।
खनिज वाहनों में लगेंगे VTS सिस्टम: राजस्थान में खनिज वाहनों पर पैनी नजर, 46 शिविरों में लगेंगे VTS
जयपुर संभाग के 8 जिलों में 5 जून तक 6470 वाहनों में व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम लगाने का लक्ष्य।
HIGHLIGHTS
- जयपुर संभाग के 8 जिलों में 5 जून तक 46 विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
- कुल 6470 खनिज परिवहन वाहनों में व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम (VTS) लगाने का लक्ष्य है।
- अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोरा ने ऑटोमाइजेशन कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
- सीकर, झुन्झुनूं, अलवर और टोंक जैसे जिलों में भी व्यापक स्तर पर शिविर आयोजित होंगे।
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46 शिविरों का मेगा अभियान
अधीक्षण खनि अभियंता एनएस शक्तावत ने बताया कि जयपुर संभाग के 8 प्रमुख कार्यालयों में 5 जून तक विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों का मुख्य लक्ष्य 6470 खनिज वाहनों को कवर करना है।
इस अभियान के अंतर्गत जयपुर, सीकर, झुन्झुनू, अलवर, टोंक, कोटपूतली, दौसा और नीमकाथाना जिलों को शामिल किया गया है। विभाग की टीमें इन जिलों के विभिन्न क्रेशर और माइन्स क्षेत्रों में तैनात रहेंगी।
अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती अपर्णा अरोरा ने पिछले दिनों तुलाई कांटों और वीटीएस के ऑटोमाइजेशन की समीक्षा की थी। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के कड़े निर्देश दिए थे।
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सरकार का मुख्य उद्देश्य खनिज परिवहन की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना है। इसी कड़ी में शिविरों के माध्यम से मौके पर ही इंस्टालेशन का कार्य किया जा रहा है।
जयपुर में 11 स्थानों पर लगेंगे शिविर
खनि अभियंता श्याम कापड़ी के नेतृत्व में जयपुर में 25 से 27 मई तक 11 शिविरों का आयोजन होगा। इन शिविरों के माध्यम से लगभग 400 वाहनों में वीटीएस सिस्टम लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
25 मई को जोबनेर तहसील के बामनियास और गुनावता में शिविर लगाए जाएंगे। इसके अलावा आमेर के ग्राम दादर में भी बालाजी स्टोन क्रेशर पर वाहन मालिकों के लिए सुविधा उपलब्ध रहेगी।
26 मई को दूदू के पलूकलां और घटियाली में विभाग की टीमें मौजूद रहेंगी। इसी दिन बस्सी तहसील के किशनपुरा और बेनाड़ा में भी खनिज वाहनों में ट्रेकिंग सिस्टम लगाया जाएगा।
27 मई को कालवाड के आनंद स्टोन क्रेशर और चौमू के हदनोदा में शिविर लगेंगे। जमवारामगढ़ के साईवर और टोडीदीपुरिया में भी इसी दिन वीटीएस इंस्टालेशन का कार्य संपन्न किया जाएगा।
सीकर और झुन्झुनू का शेड्यूल
सीकर में एमई धर्मेन्द्र भांभू के निर्देशन में 500 वाहनों का लक्ष्य है। यहाँ 20 मई से 2 जून तक खण्डेला, श्रीमाधोपुर और दांतारामगढ़ के विभिन्न क्रेशर पॉइंट पर शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
झुन्झुनूं में पुष्पेन्द्र सिंह जोधा के नेतृत्व में 1500 वाहनों में वीटीएस लगेगा। यहाँ उदयपुरवाटी, नवलगढ़, खेतड़ी और चिडावा जैसे क्षेत्रों में 5 जून तक अलग-अलग तिथियों पर शिविरों का आयोजन होगा।
विभाग की तकनीकी टीमें इन क्षेत्रों में वाहनों की फिटनेस और ट्रेकिंग डिवाइस की कार्यक्षमता की जांच भी करेंगी। इससे भविष्य में किसी भी तकनीकी खराबी की संभावना कम हो जाएगी।
अलवर और टोंक में भी काम तेज
अलवर में खनि अभियंता मनोज कुमार के क्षेत्र में 1500 वाहनों के लिए 6 शिविरों की योजना है। यहाँ मई के मध्य से ही प्रक्रिया शुरू हो चुकी है ताकि समय पर लक्ष्य प्राप्त हो सके।
टोंक में सहायक खनि अभियंता सोहन लाल सुथार 1000 वाहनों का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। यहाँ मालपुरा, पालडा, संथली और बंथली में शिविर लगाकर इंस्टालेशन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
इन शिविरों में स्थानीय स्तर पर खनिज परिवहन करने वाले ट्रक और डंपर मालिकों को आमंत्रित किया गया है। विभाग की ओर से उन्हें सिस्टम के फायदों की जानकारी भी दी जा रही है।
कोटपूतली, दौसा और नीमकाथाना की स्थिति
कोटपूतली में सहायक खनि अभियंता अमीचंद के नेतृत्व में 400 वाहनों के लिए 6 शिविर लग रहे हैं। यहाँ नवलकुशलपुरा, पवाना अहीर, पंचपहाड़ी और छितोली में वाहन मालिक वीटीएस लगवा सकते हैं।
दौसा में लक्ष्मीचन्द मीणा के क्षेत्र में 170 वाहनों के लिए बालवारन, सीकरी और सवासा में शिविर लगेंगे। नीमकाथाना में अशोक वर्मा के नेतृत्व में 1000 वाहनों के लिए 5 शिविर लगाए जाएंगे।
नीमकाथाना के झीर की चौकी, मीणा की नांगल और बिहारीपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यहाँ वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण अतिरिक्त टीमें तैनात की गई हैं।
"शिविर लगाकर खनिज परिवहन वाहनों में वीटीएस इंस्टालेशन से काम में गति आएगी और मॉनिटरिंग प्रभावी हो सकेगी। इससे खानधारकों की मॉनिटरिंग व्यवस्था भी अधिक कारगर बनेगी।" - एनएस शक्तावत, अधीक्षण खनि अभियंता
डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी पारदर्शिता
इस नई व्यवस्था से विभाग को हर खनिज वाहन की सटीक लोकेशन का पता चलेगा। इससे न केवल अवैध खनन पर रोक लगेगी, बल्कि राजस्व की चोरी को रोकने में भी बड़ी मदद मिलेगी।
वीटीएस सिस्टम के माध्यम से विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि खनन पट्टों से निकलने वाला खनिज सही रास्ते से गंतव्य तक पहुँचे। यह तकनीक खनन क्षेत्र में जवाबदेही तय करने का काम करेगी।
5 जून तक चलने वाले इस महाभियान में विभाग के सभी अधिकारी सक्रिय हैं। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का खनन क्षेत्र पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था से संचालित हो।
इस अभियान की सफलता से न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी बल्कि वैध खनन करने वाले उद्यमियों को भी सुरक्षित माहौल मिल सकेगा। विभाग आने वाले समय में इसे और विस्तार देगा।
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