राजस्थान

जल स्वावलंबन: राजस्थान बनेगा आत्मनिर्भर: मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान-2.0: राजस्थान के 20 हजार गांवों में बनेंगे 5 लाख जल ढांचे, मुख्य सचिव ने दिए कड़े निर्देश

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 18 अप्रैल 2026, 09:55 सुबह
राजस्थान में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के लिए मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 पर तेजी से काम चल रहा है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने 11,200 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समय पर लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

जयपुर | राजस्थान में पानी की एक-एक बूंद को सहेजने और प्रदेश को जल-आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार ने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान-2.0 (MJSA-2.0) इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। हाल ही में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य स्तरीय निर्देश समिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अभियान की प्रगति की समीक्षा करना और आगामी चरणों के लिए ठोस रणनीति तैयार करना था।

जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की तैयारी

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जल संरक्षण के इस अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम न मानकर एक व्यापक जन आंदोलन के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश को पानी के मामले में आत्मनिर्भर बनाना हमारी प्राथमिकता है। प्रशासनिक स्तर पर निगरानी को सख्त करते हुए उन्होंने आदेश दिया कि राज्य स्तरीय निर्देश समिति की बैठक हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए। इससे कार्यों की गुणवत्ता और गति दोनों पर नजर रखी जा सकेगी।

20 हजार गांवों के लिए बड़ा बजट

बैठक के दौरान पंचायतीराज विभाग के आयुक्त जोगा राम ने अभियान के वित्तीय और भौतिक लक्ष्यों का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत चार चरणों में प्रदेश के 20 हजार गांवों को कवर किया जाएगा। इन गांवों में कुल 5 लाख जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण करने का लक्ष्य है। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने 11,200 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है, जो ग्रामीण विकास की दिशा में बड़ा निवेश है।

पहले चरण में हासिल हुई शानदार सफलता

अभियान के पहले चरण (MJSA-2.1) के परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं। निर्धारित 1.14 लाख कार्यों के लक्ष्य के मुकाबले विभाग ने 1.17 लाख कार्य पूरे कर लिए हैं, जो कि 103 प्रतिशत की उपलब्धि है। वर्तमान में पहले चरण के 7 हजार से अधिक कार्य अभी भी प्रगति पर हैं। वहीं, द्वितीय चरण (MJSA-2.2) में अब तक 40 प्रतिशत से अधिक कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है, जिससे काम की निरंतरता बनी हुई है।

तीसरे चरण और जनभागीदारी का असर

तीसरे चरण (MJSA-2.3) के लिए भी विभाग ने कमर कस ली है और इसके तहत 1.10 लाख कार्यों की पहचान की जा चुकी है। इस अभियान की सबसे बड़ी खूबसूरती इसमें आम जनता का जुड़ाव और सक्रिय भागीदारी है। ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ के माध्यम से 11 हजार ग्राम पंचायतों में लाखों कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में 2.53 करोड़ से अधिक लोगों ने भाग लिया, जो जल संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।

खेती और किसानों की बढ़ेगी आमदनी

इस अभियान का सीधा असर राजस्थान के कृषि क्षेत्र पर पड़ने लगा है। जल संरक्षण संरचनाओं के बनने से सिंचित क्षेत्र में विस्तार हुआ है और भूजल स्तर में भी सुधार देखा गया है, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि हुई है। पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों की औसत आय में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा, कॉर्पोरेट जगत भी CSR के माध्यम से इस नेक काम में सहयोग कर रहा है, जिससे अब तक 20 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त हुई है।

मुख्य सचिव के आगामी निर्देश

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि 25 मई से शुरू होने वाले आगामी 'वन्दे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान' की गाइडलाइन तुरंत जारी की जाए। उन्होंने वित्त विभाग को निर्देश दिए कि धनराशि की उपलब्धता समय पर सुनिश्चित की जाए। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव कुंजीलाल मीना, प्रमुख शासन सचिव हेमंत गैरा, मंजू राजपाल, सचिव टीना सोनी और आयुक्त पुष्पा सत्यानी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने अभियान को सफल बनाने का संकल्प दोहराया।

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