जयपुर | राजस्थान की उपमुख्यमंत्री और महिला एवं बाल विकास मंत्री दिया कुमारी ने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा आह्वान किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में चल रहे राष्ट्रीय पोषण पखवाड़ा की सराहना की। दिया कुमारी ने कहा कि सही पोषण से ही हमारा देश रोशन होगा। जयपुर के विद्याधर नगर स्थित जेपी कॉलोनी के आंगनबाड़ी केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और दीप प्रज्वलित किया।
बच्चों के शुरुआती 6 साल हैं बेहद खास
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि बच्चों के जीवन के पहले 6 साल सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान मिलने वाला पोषण उनके पूरे जीवन की नींव रखता है। उन्होंने समुदाय की भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों की देखभाल सबकी जिम्मेदारी है। सही खान-पान ही बच्चों को एक स्वस्थ भविष्य की ओर ले जाएगा।
2047 का विकसित भारत और आज के बच्चे
दिया कुमारी का विजन 2047 के विकसित भारत पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि जो बच्चे आज जन्म ले रहे हैं, वे 2047 तक पूरी तरह युवा हो जाएंगे। यदि हम आज उन्हें सही पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य देंगे, तो भविष्य का नेतृत्व मजबूत हाथों में होगा। इससे भारत दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना पाएगा।
राजस्थान को फिर बनाना है नंबर वन
राजस्थान ने पिछले पोषण पखवाड़े में देश में पहला स्थान प्राप्त किया था। उपमुख्यमंत्री ने आईसीडीएस टीम को इस सफलता को दोहराने का कड़ा निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि हमें इस बार भी कड़ी मेहनत करनी होगी ताकि राजस्थान एक बार फिर अव्वल आए। टीम भावना से काम करने पर ही हम इस बड़े लक्ष्य को हासिल कर पाएंगे।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं असली 'पोषण दूत'
कार्यक्रम के दौरान दिया कुमारी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने उन्हें 'पोषण दूत' की संज्ञा दी और उनके ममतामयी व्यवहार की जमकर सराहना की। कार्यकर्ता खेल-खेल में बच्चों को शिक्षा और पोषण के प्रति जागरूक कर रहे हैं। यह पुनीत कार्य समाज के निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है, जो प्रशंसनीय है।
मस्तिष्क का 85 प्रतिशत विकास और निवेश
महिला एवं बाल विकास सचिव श्रीमती पूनम ने एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्य साझा किया। उन्होंने बताया कि 6 वर्ष की आयु तक बच्चों के मस्तिष्क का 85% विकास हो जाता है। इस उम्र में पोषण पर किया गया खर्च देश के लिए सबसे बड़ा उत्पादक निवेश साबित हो सकता है। इसलिए हमें बच्चों के खान-पान पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करना चाहिए।
यूनिसेफ और आईसीएसडी का साझा प्रयास
यूनिसेफ राजस्थान के स्टेट हेड के. एल. राव ने भी बच्चों के पोषण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर पोषाहार से ही बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास संभव है। आईसीएसडी निदेशक वासुदेव मालावत ने बताया कि अभियान को गांव-गांव और ढाणी-ढाणी तक पहुंचाया जा रहा है। पहले ही दिन डैशबोर्ड पर एक लाख से अधिक गतिविधियां अपलोड की गईं।
कार्यक्रम की प्रमुख गतिविधियां और शपथ
उपमुख्यमंत्री ने इस मौके पर उपस्थित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आम महिलाओं को पोषण की शपथ दिलवाई। उन्होंने 'नवचेतन मार्गदर्शिका' का विमोचन भी किया और पोषण प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने नन्हे बच्चों को न्यूट्री बार बांटे और 6 माह के बच्चों का अन्नप्राशन भी करवाया। इस अवसर पर विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
अभियान की अवधि और व्यापक लक्ष्य
बता दें कि यह आठवां पोषण पखवाड़ा 9 अप्रैल से 23 अप्रैल तक चलेगा। पूरे राजस्थान के आंगनबाड़ी केंद्रों पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य कुपोषण को जड़ से मिटाना और एनीमिया जैसी समस्याओं को कम करना है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर लोगों को पोषक तत्वों की जानकारी दी जा रही है।
सामुदायिक सहभागिता से मिलेगी सफलता
दिया कुमारी ने अंत में कहा कि सरकारी प्रयासों के साथ जब तक जनता नहीं जुड़ेगी, सफलता अधूरी रहेगी। जब हर परिवार जागरूक होगा, तभी कुपोषण मुक्त राजस्थान का सपना सच होगा। उन्होंने अपील की कि लोग अपने आसपास के बच्चों के स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें। स्वस्थ बच्चे ही एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र की असली पहचान होते हैं।