जयपुर |
राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को अपनी बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर अब राज्य में नगरीय निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण दिया जाएगा।
60 निकाय अध्यक्ष पद होंगे आरक्षित
रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के अनुसार, प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में से 60 के अध्यक्ष पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, लगभग इसी अनुपात में पंचायती राज संस्थाओं में भी आरक्षण का प्रावधान रहेगा।
इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट को अब कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा, जिसके बाद सरकार आयोग की सिफारिशों का अध्ययन कर आगे की प्रक्रिया अपनाएगी।
कंप्यूटरीकृत होगी लॉटरी प्रक्रिया
इस बार आरक्षण के लिए लॉटरी की प्रक्रिया में भी एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब लॉटरी पर्ची के बजाय पूरी तरह से कम्प्यूटर के माध्यम से निकाली जाएगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
900 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट
ओबीसी आयोग द्वारा तैयार की गई यह रिपोर्ट दो भागों में है और दोनों को मिलाकर करीब 900 पन्नों में विस्तृत जानकारी दी गई है। मुख्यमंत्री आवास पर आयोग अध्यक्ष पूर्व जिला न्यायाधीश मदन लाल भाटी ने सदस्यों के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात कर यह रिपोर्ट सौंपी।
पहले भाग में सर्वे और डेटा
रिपोर्ट के पहले भाग में जनाधार, फील्ड सर्वे, पिछले दो पंचायत-निकाय चुनावों से संबंधित डेटा और केंद्र व राज्य की ओबीसी योजनाओं का विवरण है। इसके लिए करीब 74.85 लाख परिवारों का सर्वे किया गया था।
सर्वे में सामने आया कि ओबीसी की 10-11 जातियों को ही एक हजार से अधिक लोगों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल पाया है। रिपोर्ट के अनुसार, जाट जाति की प्रदेश में सबसे अधिक आबादी है और राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी सबसे अधिक इसी जाति का रहा है।
दूसरे भाग में प्रतिनिधित्व का सुझाव
रिपोर्ट के दूसरे भाग में पंचायत और निकायों के लिए वार्ड और पद के अनुसार ओबीसी का प्रतिनिधित्व सुझाया गया है। जानकारी के अनुसार, पिछले दो चुनावों में आरक्षण के कारण ओबीसी को 10 से 14 प्रतिशत पदों पर प्रतिनिधित्व मिला, लेकिन सामान्य पदों पर जीत के कारण यह प्रतिशत पंचायतों में 46% और शहरी निकायों में 38% तक पहुंच गया।
मुख्यमंत्री ने कहा- वादा पूरा कर रहे
रिपोर्ट स्वीकार करने के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सरकार स्थानीय चुनावों को समय पर कराने का अपना वादा पूरा करने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' व्यवस्था से विकास और जनकल्याण के कार्यों को निरंतर गति मिलेगी और इससे पैसे, समय एवं संसाधनों की भी बचत होगी।
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