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राजस्थान ODOP: लोकल से ग्लोबल: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की 'एक जिला एक उत्पाद' नीति से राजस्थान के उत्पादों की दुनिया में बढ़ी धमक, मिल रही भारी सब्सिडी

मानवेन्द्र जैतावत · 31 मार्च 2026, 05:51 शाम
राजस्थान की 'एक जिला एक उत्पाद' नीति-2024 के तहत स्थानीय कारीगरों को वैश्विक मंच मिल रहा है। सरकार उद्यमियों को 25 लाख तक की सब्सिडी और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है ताकि प्रदेश के उत्पाद विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।

जयपुर | मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार स्थानीय विकास को सुदृढ़ करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठा रही है। राज्य की 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) नीति-2024 के माध्यम से प्रदेश के हर जिले की विशिष्ट पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया जा रहा है। यह नीति न केवल स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को सशक्त बना रही है, बल्कि प्रदेश में रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति भी दे रही है।

स्थानीय विकास से आत्मनिर्भर भारत का सपना

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को पूरा करने के लिए राजस्थान सरकार हर जिले के समग्र विकास पर जोर दे रही है। 'वोककल फॉर लोकल' और 'सबका साथ-सबका विकास' के मंत्र के साथ राजस्थान के उत्पाद अब विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। ओडीओपी नीति के माध्यम से राज्य के हर जिले में एक विशिष्ट उत्पाद का चयन किया गया है, ताकि स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

उद्यमियों को मिल रही भारी वित्तीय सहायता

राज्य सरकार ने उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए व्यापक वित्तीय प्रावधान किए हैं, जिससे नए उद्योगों की स्थापना आसान हो गई है। नीति के तहत नए लघु एवं सूक्ष्म ओडीओपी उद्यम स्थापित करने के लिए परियोजना लागत का 25 प्रतिशत तक मार्जिन मनी सब्सिडी दी जा रही है। इस सब्सिडी की अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये तय की गई है, जो छोटे उद्यमियों के लिए एक बड़ा संबल साबित हो रही है।

तकनीकी उन्नयन और आधुनिकरण पर जोर

सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को आधुनिक बनाने के लिए नवीनतम तकनीक और सॉफ्टवेयर के अधिग्रहण पर 50 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। तकनीकी उन्नयन के लिए दी जाने वाली इस सहायता की अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय संस्थानों से उन्नत तकनीक खरीदने पर भी सरकार उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है ताकि वे वैश्विक मानकों का मुकाबला कर सकें।

गुणवत्ता और वैश्विक प्रमाणीकरण में सहयोग

अंतरराष्ट्रीय बाजार में पैठ बनाने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सरकार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाण पत्रों पर किए गए खर्चों के लिए 75 प्रतिशत तक पुनर्भरण की सुविधा दे रही है। इस मद में उद्यमियों को अधिकतम 3 लाख रुपये तक की सहायता प्राप्त हो सकती है, जिससे उनके उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

डिजिटल मार्केट और ई-कॉमर्स विस्तार

आज के डिजिटल युग में उत्पादों की ऑनलाइन मौजूदगी अनिवार्य है, जिसे देखते हुए सरकार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर विशेष ध्यान दे रही है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए दो साल तक प्रति वर्ष 1 लाख रुपये तक का 75 प्रतिशत पुनर्भरण सरकार द्वारा देय होगा। साथ ही, कैटलॉगिंग सेवाओं और ई-कॉमर्स वेबसाइट विकास के लिए 60 प्रतिशत (अधिकतम 75 हजार रुपये) तक की मदद दी जा रही है।

विपणन और ब्रांडिंग को नया आयाम

नीति के तहत उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए राज्य सरकार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शनियों का आयोजन कर रही है। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से स्थानीय कारीगरों को बड़े खरीदारों से सीधे जुड़ने का मौका मिल रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो रही है। उद्यमियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे बदलती बाजार मांग के अनुसार अपने उत्पादों में सुधार कर सकें।

रोजगार के नए अवसरों का सृजन

इस नीति के सफल क्रियान्वयन से गांवों और कस्बों में उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा हो रहे हैं। अब तक अनेक लाभार्थियों को सहायता राशि वितरित की जा चुकी है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। मार्केटिंग, ई-कॉमर्स और गुणवत्ता सुधार के क्षेत्रों में सरकार का निरंतर सहयोग राजस्थान को एक औद्योगिक हब बनाने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यह विजन राजस्थान के पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़कर प्रदेश को आर्थिक रूप से समृद्ध बना रहा है।

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