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18 करोड़ की सौगात: राजस्थान ODOP 5 जिलों के उत्पादों को मिलेगी वैश्विक पहचान

बलजीत सिंह शेखावत · 14 मई 2026, 11:41 दोपहर
राजस्थान सरकार ने ODOP नीति के तहत 5 जिलों के लिए 18.19 करोड़ की परियोजनाओं को दी मंजूरी।

जयपुर | राजस्थान सरकार ने 'एक जिला एक उत्पाद' (ओडीओपी) नीति के तहत प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए 18.19 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

पांच जिलों में अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास

पंच गौरव कार्यक्रम के तहत राज्य स्तरीय समिति ने दौसा, चूरू, डीडवाना-कुचामन, फलोदी और बालोतरा में कॉमन फैसिलिटी सेंटर और टेस्टिंग लैब विकसित करने का निर्णय लिया है।

दौसा में पत्थर आधारित उत्पादों के लिए 3.30 करोड़ की लागत से टेक्नोलॉजी फैसिलिटेशन सेंटर बनेगा। यह केंद्र आधुनिक कटिंग और फिनिशिंग की सुविधाएं प्रदान करेगा।

चूरू में लकड़ी के उत्पादों के लिए 2.5 करोड़ की लागत से बीआईएस टेस्टिंग लैब स्थापित होगी। इससे स्थानीय हस्तशिल्प अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा कर सकेंगे।

बालोतरा में करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से टेक्सटाइल डिजिटल प्रिंटिंग सेंटर बनाया जाएगा। यह वस्त्र उत्पादों के डिजाइन और प्रिंटिंग में नई तकनीक लाएगा।

डीडवाना-कुचामन में स्टोन प्रोसेसिंग के लिए 5.05 करोड़ की लागत से सीएनसी मशीन टेक्नोलॉजी सेंटर स्थापित होगा, जो पत्थर उद्योग को नई ऊंचाई देगा।

फलोदी में सोनामुखी के सुरक्षित भंडारण के लिए 2.35 करोड़ की लागत से क्लाइमेट कंट्रोल्ड वेयरहाउस बनाया जाएगा। इससे फसल की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहेगी।

ओडीओपी नीति: उद्यमियों के लिए प्रोत्साहन

सरकार इस नीति के माध्यम से सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को 20 लाख रुपये तक की मार्जिन मनी अनुदान के रूप में प्रदान कर रही है।

उद्यमियों को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर अपनाने के लिए 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इससे उत्पादन प्रक्रिया में आधुनिकता आएगी।

विपणन आयोजनों और प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए 2 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। इससे स्थानीय उत्पादों की पहुंच वैश्विक बाजारों तक होगी।

ई-कॉमर्स के क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए प्लेटफॉर्म फीस पर 1 लाख रुपये प्रतिवर्ष का पुनर्भरण किया जाएगा। यह सहायता दो वर्षों तक मिलेगी।

"इस पहल का मुख्य उद्देश्य राजस्थान के पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना और स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा करना है।"

कैटलॉगिंग और ई-कॉमर्स वेबसाइट विकास के लिए 75 हजार रुपये तक की एकमुश्त सहायता दी जाएगी। साथ ही क्वालिटी सर्टिफिकेशन पर 3 लाख का पुनर्भरण होगा।

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव

इन परियोजनाओं से न केवल उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि निर्यात में भी वृद्धि होगी। राजस्थान के कारीगर अब सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़ सकेंगे।

यह कदम प्रदेश को औद्योगिक हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे स्थानीय स्तर पर हजारों नए रोजगार सृजित होने की प्रबल संभावना है।

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