जयपुर | राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव 2026 का बिगुल बज चुका है। राज्य निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए तैयारी पूरी कर ली है।
प्रशासन ने शांतिपूर्ण और पारदर्शी चुनाव संपन्न कराने के उद्देश्य से 10 बड़े और कड़े प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए हैं। आचार संहिता प्रभावी होते ही प्रशासनिक अमला एक्शन मोड में आ गया है।
सरकारी कर्मचारियों के अवकाश पर तत्काल रोक
चुनाव की घोषणा के साथ ही जिले में कार्यरत सभी राजकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश पर रोक लगा दी गई है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिला कलक्टर द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, कोई भी कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेगा।
अति आवश्यक स्थिति में केवल जिला निर्वाचन अधिकारी या उप जिला निर्वाचन अधिकारी की अनुमति अनिवार्य होगी। आदेश की अवहेलना करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
लाउडस्पीकर और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण
ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव प्रचार के दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर कड़े नियम बनाए गए हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर समय की पाबंदी लगाई है।
समय सीमा और डेसिबल मानक
- रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
- दिन के समय भी निर्धारित डेसिबल मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।
- तेज आवाज में प्रचार करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रचार वाहनों और सभाओं के लिए अनुमति
प्रचार वाहनों पर लाउडस्पीकर लगाने या सार्वजनिक सभा और जुलूस निकालने के लिए पूर्व लिखित अनुमति लेना आवश्यक है। यह अनुमति संबंधित उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) से लेनी होगी।
बिना अनुमति या तय समय के बाद लाउडस्पीकर का उपयोग करने पर राजस्थान कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी। प्रचार वाहनों का खर्च उम्मीदवार के चुनावी खर्च में जोड़ा जाएगा।
धारा 163 (BNSS) का क्रियान्वयन
शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई है। इसके तहत सार्वजनिक स्थलों पर हथियारों के प्रदर्शन पर रोक है।
अस्त्र-शस्त्र, तलवार और लाठी लेकर चलने पर प्रतिबंध है। विस्फोटक सामग्री का परिवहन या प्रदर्शन पूरी तरह वर्जित है।
चुनाव प्रचार की समय सीमा में कटौती
सरपंच पद के उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार का समय काफी कम कर दिया गया है। नामांकन वापसी और चुनाव चिन्ह आवंटन के बाद केवल 24 घंटे का समय मिलेगा।
इस नियम का मुख्य उद्देश्य चुनाव में होने वाले अनावश्यक खर्च को रोकना है। साथ ही धनबल के प्रभाव को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
विजय जुलूस पर पूर्ण प्रतिबंध
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव परिणाम के बाद कोई विजय जुलूस नहीं निकाला जाएगा। यह नियम सभी पदों के लिए समान रूप से लागू है।
- जिला प्रमुख और उप प्रधान के विजय जुलूस पर रोक है।
- सरपंच, उप सरपंच और वार्ड पंच भी जुलूस नहीं निकाल सकेंगे।
- उल्लंघन करने वालों पर सख्त धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होगा।
हथियारों के प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर निगरानी
हनुमानगढ़ जैसे संवेदनशील जिलों में हथियारों के प्रदर्शन पर विशेष सख्ती बरती जा रही है। बिना अनुमति रैली निकालने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी प्रशासन की पैनी नजर है। भड़काऊ भाषण या धार्मिक दुष्प्रचार करने वाली पोस्ट पर आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।
निजी संपत्ति पर बिना अनुमति पोस्टर या बैनर चिपकाना भी प्रतिबंधित किया गया है।
मतदान केंद्र पर मोबाइल और वाहनों पर रोक
मतदान के दिन पोलिंग बूथ के 200 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन ले जाना प्रतिबंधित रहेगा। यह नियम मतदाताओं और अन्य व्यक्तियों पर लागू होगा।
मतदाताओं को निजी वाहनों में बिठाकर मतदान केंद्र तक लाने-ले जाने पर भी रोक लगाई गई है। सुरक्षा के लिए बूथ के आसपास कड़े इंतजाम किए गए हैं।
ड्राई डे और शराबबंदी के नियम
चुनाव को शांतिपूर्ण बनाने के लिए मतदान से 48 घंटे पहले 'ड्राई डे' घोषित किया गया है। मतगणना के दिन भी शराब की दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी।
अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें तैनात की गई हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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