राजनीति

पंचायत चुनाव: राजस्थान पंचायत चुनाव: भाजपा-कांग्रेस की चुनावी तैयारी

बलजीत सिंह शेखावत · 23 अक्टूबर 2026, 11:19 दोपहर
राजस्थान में पंचायत चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद भाजपा और कांग्रेस ने अगले चरणों के लिए अपनी चुनावी रणनीति को और अधिक सक्रिय कर दिया है। दोनों पार्टियां अब उम्मीदवारों के चयन और जीत के समीकरणों को साधने में जुटी हुई हैं।

जयपुर | राजस्थान में पंचायत चुनाव के पहले चरण का मतदान समाप्त होते ही भाजपा और कांग्रेस ने अगले चरणों के लिए चुनावी रणनीति तेज कर दी है। दोनों दलों के वॉर रूम सक्रिय हो गए हैं।

भाजपा की चुनावी रणनीति और चिंता

पंचायत चुनाव के पहले चरण का मतदान होने के साथ ही भाजपा का रणनीतिक और विश्लेषणात्मक तंत्र पूरी तरह सक्रिय हो गया है। पार्टी स्थानीय स्तर पर समीकरण साधने में जुटी है।

कई जगह मतदान उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने से बीजेपी की चिंता बढ़ गई है। शुरुआती आकलन में जिन जिला परिषदों में पार्टी एकतरफा जीत का दावा कर रही थी, वहां मुकाबला कड़ा माना जा रहा है।

इन करीबी समीकरणों को देखते हुए पार्टी ने चुनाव परिणाम से पहले ही अपने प्रत्याशियों की 'बाड़ाबंदी' की तैयारियां शुरू कर दी है।

प्रत्याशियों का चयन और नामांकन

भाजपा ने तीसरे और चौथे चरण के जिला परिषद चुनावों के लिए प्रत्याशियों की चयन प्रक्रिया पूरी कर ली है।

पार्टी ने तीसरे चरण की 17 जिला परिषदों के लिए कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। वरिष्ठ नेताओं के माध्यम से उम्मीदवारों को फोन पर ही नामांकन दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

नामांकन प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए प्रत्याशियों को सिंबल देने के बजाय जिला प्रभारी सीधे रिटर्निंग अधिकारी को पार्टी का सिंबल सौंपेंगे।

कांग्रेस की सियासी मशक्कत

पंचायत चुनाव के तीसरे चरण के लिए कांग्रेस ने प्रत्याशियों के चयन और सिंबल वितरण का कार्य पूरा कर लिया है।

शुक्रवार को नामांकन का अंतिम दिन होने के कारण पार्टी को प्रत्याशियों के नामों पर सहमति बनाने के लिए अंतिम समय तक भारी सियासी मशक्कत करनी पड़ी।

चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों के नाम तय करने के लिए प्रदेश कांग्रेस के वॉररूम और विभिन्न जिलों में 'पॉलिटिकल अफेयर कमेटियों' की अहम बैठकें हुई।

गुटबाजी और डोटासरा की भूमिका

बैठकों के दौरान टिकटों को लेकर स्थानीय नेताओं के बीच गुटबाजी और टकराव खुलकर सामने आया।

भरतपुर और डीग सहित कई जिलों की बैठकों की कमान प्रदेश सह-प्रभारी चिरंजीवी राव ने संभाली।

जिन सीटों पर विवाद ज्यादा था, वहां प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मोर्चा संभाला। डोटासरा ने नेताओं से सीधा संवाद कर विवाद को सुलझाया और फीडबैक लिया।

नेताओं की सहमति बनते ही जिला परिषद और पंचायत समिति वार्डों के प्रत्याशियों को पार्टी के सिंबल भेज दिए गए।

तीसरे चरण की इस राजनीतिक प्रक्रिया के पूरे होने के बाद अब चौथे चरण में कांग्रेस को केवल जैसलमेर जिले के प्रत्याशियों के लिए मंथन करना शेष रह गया है।

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