जयपुर | राजस्थान में भजनलाल सरकार के सामने एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो गई है। राज्य के पंचायतीराज विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों ने अपनी 8 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है और अब राजधानी जयपुर में डेरा डालने की तैयारी कर ली है।
क्यों सड़कों पर उतरे सरकारी कर्मचारी?
पिछले करीब 20 दिनों से 'स्वाभिमान बचाओ आंदोलन' के बैनर तले ये कर्मचारी ब्लॉक और जिला स्तर पर पेन-डाउन हड़ताल कर रहे हैं। इस हड़ताल के कारण ग्रामीण इलाकों में आम जनता के रोजमर्रा के प्रशासनिक काम पूरी तरह से ठप हो गए हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई लिखित और ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
ठप पड़े ग्रामीण विकास के काम
इस आंदोलन का सबसे बड़ा असर ग्रामीण विकास योजनाओं पर पड़ा है। सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे 'ग्रामीण सेवा शिविर' भी कर्मचारियों के बहिष्कार के कारण ठप हो गए हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारी दफ्तर तो आ रहे हैं, लेकिन किसी भी सरकारी फाइल पर काम नहीं कर रहे हैं। यहां तक कि महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और बैठकों का भी सामूहिक रूप से बहिष्कार किया जा रहा है।
क्या हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें?
कर्मचारी संगठन का कहना है कि वे लंबे समय से केवल आश्वासनों पर काम कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में उत्तराखंड राज्य की तर्ज पर मंत्रालयिक कैडर का पुनर्गठन करना शामिल है, ताकि उन्हें पदोन्नति के बेहतर अवसर मिल सकें।
इसके अलावा, एक पारदर्शी अंतर-जिला स्थानांतरण नीति, पदनाम में बदलाव, और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने के लिए 'हार्ड ड्यूटी भत्ता' जैसी मांगें भी शामिल हैं।
कर्मचारी संगठन ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई लिखित और ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन थमने वाला नहीं है।
सरकार नहीं मानी तो 'जल समाधि'!
संगठन ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए एक बड़ी रणनीति तैयार की है। 23 से 25 जून तक पूरे राजस्थान से कर्मचारी जयपुर में जुटेंगे और मंत्रियों व अधिकारियों को मांग पत्र सौंपेंगे।
अगर इसके बाद भी सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। 6 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की योजना है।
इस आंदोलन का सबसे चौंकाने वाला कदम 7 जुलाई को उठाया जाएगा। कर्मचारियों ने घोषणा की है कि वे अपनी मांगों की अनदेखी के विरोध में जयपुर के ऐतिहासिक 'जल महल' के सामने एकत्रित होकर 'जल समाधि' लेंगे।
अब देखना यह है कि क्या सरकार कर्मचारियों के इस अल्टीमेटम के आगे झुकती है या यह प्रशासनिक टकराव और गहराता है, जिससे ग्रामीण राजस्थान में विकास के पहिए पूरी तरह थम जाएंगे।
*Edit with Google AI Studio