जयपुर | राजस्थान के पेट्रोल पंपों पर इन दिनों एक अजीब सा 'वेट लॉस' प्रोग्राम चल रहा है। यहाँ गाड़ियाँ तो भारी हो रही हैं, लेकिन पेट्रोल की मात्रा धीरे-धीरे कम होती जा रही है। मंत्री सुमित गोदारा ने जब इस जादुई खेल को देखा, तो उन्होंने अपनी टीम के साथ औचक निरीक्षण का ऐसा चक्रव्यूह रचा कि बड़े-बड़े 'तेल के खेल' करने वाले चित हो गए। विभाग की इस कार्रवाई ने पूरे प्रदेश के पेट्रोल पंप मालिकों में हड़कंप मचा दिया है।
पेट्रोल पंपों का 'डाइटिंग' प्लान फेल
उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री सुमित गोदारा को खबर मिली थी कि प्रदेश के कुछ पेट्रोल पंप 'कंजूसी' के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।
5 मई से 18 मई तक विभाग के 23 जांबाज जांच दलों ने 20 जिलों में धावा बोल दिया। कुल 226 पेट्रोल पंपों की कुंडली खंगाली गई।
जांच में जो सामने आया वह चौंकाने वाला था। 60 पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा से कम पेट्रोल और डीजल थमाया जा रहा था।
यह कोई मामूली भूल नहीं बल्कि तकनीकी कलाकारी थी। विभाग ने तुरंत एक्शन लेते हुए 103 नोजल को 'कोमा' में भेज दिया यानी उन्हें सीज कर दिया।
नोजल सीज करने का 'स्कोरकार्ड'
अगर हम जिलों की बात करें तो जयपुर इस मामले में काफी 'सक्रिय' दिखा। यहाँ 3 पंपों के 12 नोजल सीज किए गए।
नागौर में 4 पंपों पर 11 नोजल और बाड़मेर में 6 पंपों पर 10 नोजल सीज हुए। सिरोही में तो 7 पंपों पर 9 नोजल बंद किए गए।
दौसा में 2 पंपों पर 7 नोजल और भरतपुर में 4 पंपों पर 6 नोजल सीज कर विभाग ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
अलवर, जोधपुर और पाली में भी 5-5 नोजल को ताला लगा दिया गया। ऐसा लगता है कि तेल चोरी की यह बीमारी पूरे प्रदेश में फैली थी।
जादुई 30 से 120 मिलीलीटर का खेल
जांच के दौरान पता चला कि कुछ पेट्रोल पंप प्रति 5 लीटर पर 30 मिली से लेकर 120 मिली तक तेल डकार रहे थे।
आम आदमी को लगता है कि थोड़ा सा कम है तो क्या हुआ, लेकिन बूंद-बूंद से घड़ा भरता है और यहाँ तो घड़ा खाली हो रहा था।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इन अनियमितताओं की वजह से उपभोक्ताओं को रोजाना लगभग 211 लीटर तेल कम मिल रहा था।
इस 'गायब' तेल की कीमत रोजाना 21,100 रुपये बैठती है। महीने भर का हिसाब लगाएं तो यह 6.35 लाख रुपये का बड़ा स्कैम है।
जुर्माने की बरसात और विधिक कार्रवाई
विभाग ने केवल नोजल सीज नहीं किए, बल्कि जेब भी ढीली करवाई। कुल 110 पेट्रोल पंपों पर 2,21,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
विधिक मापविज्ञान अधिनियम के तहत यह कार्रवाई की गई है। इसमें 72 पंप ऐसे भी थे जहाँ 5 लीटर का पैमाना ही गायब था।
कुछ पंपों पर तो सत्यापन प्रमाण पत्र ही नहीं थे। ऐसा लग रहा था जैसे पंप मालिक अपनी ही दुनिया में नियम बना रहे थे।
कोटा, उदयपुर, डूंगरपुर और बीकानेर जैसे जिलों में भी विभाग की टीमों ने नोजल सीज कर सख्त संदेश दिया है।
"उपभोक्ताओं के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हर बूंद का हिसाब होगा और अनियमितता करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।"
जनता जनार्दन के लिए जरूरी सलाह
विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि जब भी तेल भरवाएं, अपनी आँखें और दिमाग दोनों खुले रखें।
अगर आपको शक हो कि मीटर तेज भाग रहा है और तेल कम आ रहा है, तो तुरंत 5 लीटर के माप से जांच करवाएं।
हर पेट्रोल पंप पर यह माप रखना अनिवार्य है। अगर पंप मालिक मना करे, तो समझ जाइए कि दाल में कुछ काला है।
ऐसी किसी भी स्थिति में विभागीय कार्यालय को सूचित करें। आपकी एक शिकायत कई लोगों की जेब कटने से बचा सकती है।
मंत्री सुमित गोदारा का यह औचक निरीक्षण अभियान एक चेतावनी है। यह साफ है कि अब मशीनों में हेराफेरी कर जनता को ठगना आसान नहीं होगा।
विभाग की इस मुस्तैदी से उम्मीद जागी है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल पंपों पर पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को पूरा तेल मिलेगा।
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