जयपुर | राजस्थान पुलिस के 77वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक बेहद खास और भावुक कर देने वाला नजारा देखने को मिला। पुलिस ने केवल अपराधियों को पकड़ने वालों का ही नहीं, बल्कि समाज में चुपचाप मानवता की सेवा कर रहे 'अनसंग हीरोज' का भी सम्मान किया।
समाज और पुलिस की अटूट भागीदारी
महानिदेशक पुलिस (DGP) राजीव शर्मा ने सांस्कृतिक संध्या के दौरान तीन ऐसे व्यक्तियों को राज्य स्तरीय प्रशस्ति पत्र से नवाजा, जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के पुलिस का सहयोग किया।
डीजीपी शर्मा ने कहा कि पुलिस और समाज के बीच यह भागीदारी ही एक सुरक्षित प्रदेश की नींव है। उन्होंने इन तीनों के कार्यों को पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का पुंज बताया।
पुलिसिंग केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं है, बल्कि समाज के साथ मिलकर एक सुरक्षित माहौल तैयार करना भी है। इन नायकों ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को बखूबी समझा है।
प्रकाश प्रजापति: लावारिसों के 'अपने'
सिरोही के प्रकाश प्रजापति पिछले 27 वर्षों से मानवता की सेवा कर रहे हैं। वे पुलिस और प्रशासन के लिए किसी 'संकटमोचक' से कम नहीं हैं।
उन्होंने अब तक 1584 लावारिस और दुर्घटना में मृत व्यक्तियों के शवों को उनके गंतव्य तक पहुँचाया है। वे पूरे विधि-विधान से इन शवों का अंतिम संस्कार भी करते हैं।
कोरोना काल की वह भयावह स्थिति जब लोग अपनों को छूने से डर रहे थे, तब प्रकाश जी ने 360 कोरोना पॉजिटिव शवों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार किया।
वे यहीं नहीं रुके, उन्होंने स्वयं देहदान की घोषणा की है और 19 अन्य लोगों को भी इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित किया है। उनकी सेवा आज एक मिसाल बन चुकी है।
सुजीत कश्यप: जान बचाने का जज्बा
झालावाड़ के सुजीत कश्यप उर्फ राम कश्यप ने कई मौकों पर लोगों के लिए 'देवदूत' बनकर काम किया है। उन्होंने कड़ाके की ठंड में एक लावारिस नवजात की जान बचाई।
उन्होंने न केवल उस बच्चे को अस्पताल पहुँचाया, बल्कि उसे कानूनी संरक्षण दिलाने के लिए पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज कराई। सड़क हादसों में भी वे हमेशा मदद के लिए तैयार रहते हैं।
वर्ष 2022 की भीषण बाढ़ के दौरान सुजीत ने अपनी जान की परवाह नहीं की। उन्होंने जोखिम उठाकर 15-20 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें नया जीवन दिया।
चाहे कोटा रेफर किए गए गंभीर मरीज हों या मेलों में होने वाले हादसे, सुजीत हमेशा पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आते हैं।
सिंधु बिनुजीत: बच्चों की ढाल
उदयपुर की सिंधु बिनुजीत ने बाल संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक काम किया है। उन्होंने संभाग स्तरीय बाल सुरक्षा सलाहकार के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
डूंगरपुर से शुरू हुआ उनका 'बाल मित्र थाना' और 'सुरक्षित विद्यालय' नवाचार पूरे उदयपुर रेंज में एक मॉडल बन चुका है। उन्होंने बच्चों के मन से पुलिस का डर निकाला है।
सिंधु ने 'वत्सल वार्ताओं' के जरिए बच्चों और पुलिस के बीच आत्मीयता का रिश्ता कायम किया। उनके प्रयासों से बाल श्रम और पलायन जैसी कुरीतियों पर लगाम लगी है।
यूनिसेफ के साथ मिलकर किए गए उनके कार्यों की सराहना स्वयं मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं। वे समाज के सबसे कोमल हिस्से यानी बच्चों के भविष्य को सुरक्षित कर रही हैं।
प्रेरणा का संदेश
राजस्थान पुलिस द्वारा इन नायकों का सम्मान यह संदेश देता है कि अच्छाई कभी छिपती नहीं है। समाज के प्रति समर्पण ही व्यक्ति को असली पहचान दिलाता है।
ये तीन कहानियां हमें सिखाती हैं कि यदि हम चाहें, तो अपने स्तर पर छोटे-छोटे प्रयासों से समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं और पुलिस के मददगार बन सकते हैं।