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राजस्थान में 18 पीटीआई बर्खास्त: राजस्थान में 18 सरकारी पीटीआई बर्खास्त: फर्जी डिग्री और मिसमैच के कारण 29 महीने की नौकरी के बाद गिरी गाज, बांसवाड़ा में बड़ी कार्रवाई

thinQ360 · 22 अप्रैल 2026, 11:16 दोपहर
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में 18 शारीरिक शिक्षकों को फर्जी डिग्री और दस्तावेजों में गड़बड़ी के कारण बर्खास्त कर दिया गया है। ये शिक्षक पिछले 29 महीनों से कार्यरत थे, लेकिन जांच में इनकी डिग्रियां फर्जी पाई गईं।

बांसवाड़ा | राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां सरकारी स्कूलों में कार्यरत 18 शारीरिक शिक्षकों (PTI) को उनकी सेवाओं से बर्खास्त कर दिया गया है।

यह कार्रवाई उनकी डिग्रियां फर्जी पाए जाने और दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां (मिसमैच) मिलने के बाद की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी जयदीप पुरोहित ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।

बर्खास्त किए गए ये शिक्षक पिछले 29 महीनों से अपनी सेवाएं दे रहे थे। लेकिन अब उनकी पात्रता को पूरी तरह से अवैध घोषित कर दिया गया है।

भर्ती प्रक्रिया और फर्जीवाड़े का खुलासा

मामला ग्रेड थर्ड पीटीआई भर्ती-2022 से जुड़ा हुआ है। इस भर्ती के दौरान सैकड़ों अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। चयन के बाद जब दस्तावेजों का सत्यापन हुआ, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

निदेशालय की ओर से प्रदेश भर के कुल 35 पीटीआई की एक सूची जारी की गई थी। इस सूची में 19 शिक्षक अकेले बांसवाड़ा जिले के थे।

इन 19 मामलों में से 18 पर सीधी कार्रवाई की गई है। जबकि एक मामले की गहन जांच के लिए उसे संयुक्त निदेशक उदयपुर को भेजा गया है।

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बनी कमेटी

जिला शिक्षा अधिकारी जयदीप पुरोहित ने बताया कि शुरुआती जांच में ही इन अभ्यर्थियों की डिग्रियां संदिग्ध पाई गई थीं। विभाग ने जब इन पर कार्रवाई की तैयारी की, तो अभ्यर्थी हाईकोर्ट चले गए।

हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक तीन सदस्यीय विशेष कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी ने दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन किया।

जांच कमेटी की रिपोर्ट में भी इन अभ्यर्थियों की डिग्रियां और दस्तावेज 'मिसमैच' पाए गए। इसके बाद निदेशालय ने सख्त रुख अपनाते हुए बर्खास्तगी के निर्देश दिए।

किन क्षेत्रों के स्कूलों में थे तैनात?

बर्खास्त किए गए शिक्षक बांसवाड़ा जिले के विभिन्न ब्लॉकों में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इनमें मुख्य रूप से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के स्कूल शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार, ये शिक्षक सज्जनगढ़, गांगड़तलाई, बागीदौरा और आनंदपुरी क्षेत्र के स्कूलों में नियुक्त थे। शुक्रवार को निदेशालय से आदेश मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया।

विभाग ने महज दो दिनों के भीतर संबंधित स्कूलों के प्रिंसिपल्स को बुलाया। उन्हें इन शिक्षकों की बर्खास्तगी के आदेश थमा दिए गए ताकि तुरंत प्रभाव से कार्रवाई हो सके।

कर्मचारी चयन बोर्ड की सुनवाई

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने इन अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया था। बोर्ड के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान ये अभ्यर्थी कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

बोर्ड ने पाया कि अभ्यर्थियों द्वारा पेश किए गए दस्तावेज और आवेदन के समय दी गई जानकारी में भारी अंतर था। इसके बाद बोर्ड ने शिक्षा निदेशक को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा।

2022 की भर्ती का काला सच

साल 2022 में पीटीआई के 5546 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इस भर्ती प्रक्रिया के शुरू होते ही फर्जी डिग्रियों का खेल भी शुरू हो गया था।

जब सफल अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन हुआ, तो कई डिग्रियां फर्जी पाई गईं। इसके बाद राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने मामले की कमान संभाली।

एसओजी ने जांच के बाद 165 से ज्यादा अभ्यर्थियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज किया था। अब तक इस भर्ती में 134 से ज्यादा शिक्षक बर्खास्त किए जा चुके हैं।

बिना ग्रेजुएशन किए बन गए पीटीआई

एसओजी की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ था। करीब 21 अभ्यर्थी ऐसे पाए गए जिन्होंने बिना ग्रेजुएशन किए ही बीपीएड (B.P.Ed) की डिग्री हासिल कर ली थी।

इन अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद स्थित जेएस विश्वविद्यालय से बैक डेट में फर्जी डिग्रियां बनवाई थीं। इसके लिए लाखों रुपये का लेन-देन हुआ था।

जांच में सामने आया कि अभ्यर्थियों ने अरनी विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश से फर्जी स्नातक की मार्कशीट भी लगवाई थी। जबकि विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में उनका नाम तक नहीं था।

एसओजी की रडार पर फर्जी यूनिवर्सिटी

एसओजी ने इस मामले में जेएस विश्वविद्यालय के चांसलर, रजिस्ट्रार और दलालों को गिरफ्तार किया है। इस यूनिवर्सिटी से करीब 245 अभ्यर्थियों ने फर्जी डिग्रियां ली थीं।

पेपर लीक माफियाओं ने अयोग्य अभ्यर्थियों के लिए निजी विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर यह पूरा सिंडिकेट चलाया था। घर बैठे डिग्रियां बांटने का यह धंधा करोड़ों का था।

शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव

सरकारी स्कूलों में इस तरह फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति से शिक्षा के स्तर पर बुरा असर पड़ता है। योग्य उम्मीदवार बाहर रह जाते हैं और अयोग्य लोग सिस्टम में घुस जाते हैं।

विभाग अब इन बर्खास्त शिक्षकों से पिछले 29 महीनों में लिए गए वेतन की वसूली पर भी विचार कर सकता है। हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अभ्यर्थियों के लिए चेतावनी

राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार अब बहुत सख्त है। फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी देने पर न केवल नौकरी जाएगी, बल्कि जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे केवल मान्यता प्राप्त संस्थानों से ही अपनी पढ़ाई पूरी करें। किसी भी दलाल या फर्जी यूनिवर्सिटी के झांसे में न आएं।

आगे की कार्रवाई

बांसवाड़ा के शिक्षा विभाग का कहना है कि वे रिक्त हुए पदों पर नई नियुक्तियों के लिए निदेशालय को लिखेंगे। ताकि बच्चों की खेल शिक्षा प्रभावित न हो।

आने वाले दिनों में कुछ और जिलों से भी इसी तरह की बर्खास्तगी की खबरें आ सकती हैं। क्योंकि एसओजी की जांच अभी भी जारी है।

इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, विभाग की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना भी हो रही है।

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