जयपुर | राजस्थान में सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के प्रशासनिक कार्यों को आधुनिक बनाने के लिए 'राज-काज' पोर्टल को पूरी तरह लागू कर दिया गया है।
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सरकारी कामकाज में न केवल तेजी आई है, बल्कि फाइलों के निस्तारण में पारदर्शिता भी बढ़ी है। अब सचिवालय से लेकर ब्लॉक स्तर तक की फाइलें डिजिटल मोड में प्रोसेस हो रही हैं।
मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में प्रदेश के 71 प्रशासनिक विभागों और 57 हजार से अधिक कार्यालयों को इस एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा चुका है। इससे विभागों के बीच तालमेल अब पहले से कहीं अधिक प्रभावी और त्वरित हो गया है।
47 लाख ई-फाइलों का रिकॉर्ड निस्तारण
राज-काज प्रणाली की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 47 लाख से अधिक ई-फाइलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। यह राज्य की प्रशासनिक दक्षता का एक बड़ा प्रमाण है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, केवल फरवरी और मार्च 2026 के दौरान ही राज्य स्तर पर 8.34 लाख ई-फाइलों का निष्पादन किया गया। इन फाइलों के करीब 48.36 लाख से अधिक मूवमेंट्स दर्ज किए गए, जो सिस्टम की गति को दर्शाते हैं।
सचिवालय स्तर पर भी कामकाज की गति काफी तेज रही है। इन दो महीनों में सचिवालय के 4017 कार्मिकों ने 11,546 नई ई-फाइलें बनाईं और करीब 5 लाख फाइल मूवमेंट्स रिकॉर्ड किए गए, जिससे मैन्युअल फाइलों पर निर्भरता कम हुई है।
डाक और पत्रों का भी हुआ डिजिटलीकरण
पुरानी मैन्युअल प्रक्रियाओं को खत्म कर अब डाक और पत्रों का आदान-प्रदान भी डिजिटल हो गया है। इससे फाइलों के गुम होने या देरी होने की समस्या लगभग समाप्त हो गई है और जवाबदेही तय हुई है।
फरवरी और मार्च 2026 में राज्य स्तर पर 2.07 लाख पत्र प्राप्त हुए और 3.9 लाख ई-डाक प्रेषित की गईं। सचिवालय में भी 47.50 हजार पत्र डिजिटल माध्यम से प्राप्त किए गए और करीब 37 हजार ई-डाक भेजी गई।
इस व्यवस्था से भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है और फाइलों की ट्रैकिंग आसान हुई है। अब कोई भी उच्च अधिकारी यह देख सकता है कि कौन सी फाइल किस स्तर पर और कितने समय से लंबित है, जिससे कार्य संस्कृति में सुधार आया है।
राज-काज 2.0: भविष्य की तैयारी
सरकार अब राज-काज 2.0 के माध्यम से इस प्रणाली को और अधिक उन्नत बना रही है। इसमें कार्मिक प्रबंधन, सेवा नियम और पदनाम प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण मॉड्यूल सफलतापूर्वक क्रियान्वित किए जा चुके हैं।
इस सिस्टम की पारदर्शिता का सबसे बड़ा उदाहरण अचल संपत्ति विवरण (IPR) है। जनवरी 2026 में रिकॉर्ड 8,00,444 राजकार्मिकों ने अपना संपत्ति विवरण ऑनलाइन जमा किया है, जो डिजिटल इंडिया के विजन को मजबूती देता है।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास स्वयं इस पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वे औसत फाइल निस्तारण समय जैसे संकेतकों पर नजर रखते हैं ताकि आम जनता के काम समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरे हों।
सुशासन और नागरिक केंद्रित सेवाएं
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का लक्ष्य राजस्थान को डिजिटल गवर्नेंस में देश का अग्रणी राज्य बनाना है। राज-काज पोर्टल इसी विजन को धरातल पर उतारने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।
इस प्रणाली से न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि कागज के उपयोग में कमी आने से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। यह एक आधुनिक, जवाबदेह और पारदर्शी शासन की नई पहचान है।
आने वाले समय में राज-काज पोर्टल में और भी कई नागरिक केंद्रित सेवाएं जोड़ी जाएंगी। इससे आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी और जनसेवा को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सकेगा।