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राजस्थान का 'राज-ममता' अभियान: राजस्थान में मानसिक स्वास्थ्य के लिए 'राज-ममता' अभियान शुरू, अब तनाव और अवसाद से मिलेगी मुक्ति

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 22 अप्रैल 2026, 09:16 सुबह
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार ने 'राज-ममता' कार्यक्रम शुरू किया है। इसका उद्देश्य प्रदेशवासियों को मानसिक संबल प्रदान करना और अवसाद जैसी समस्याओं को दूर करना है।

जयपुर | राजस्थान सरकार अब प्रदेश के लोगों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाने के लिए कमर कस चुकी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष पहल की शुरुआत हुई है।

‘विकसित राजस्थान-2047’ के सपने को पूरा करने के लिए 'सभी के लिए मानसिक स्वास्थ्य' का लक्ष्य रखा गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए बजट में ‘राज-ममता’ कार्यक्रम की घोषणा की गई थी।

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर इस कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सरकार का विजन मानसिक रोगों के प्रति समाज की सोच बदलना है।

क्या है 'राज-ममता' कार्यक्रम?

'राज-ममता' का पूरा नाम 'राजस्थान मेंटल अवेयरनेस, मॉनिटरिंग एंड ट्रीटमेंट फोर ऑल' है। इसका मुख्य मकसद हर नागरिक को मानसिक संबल देना और अवसाद जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करना है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से राजस्थान अब मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश के एक ‘मॉडल राज्य’ के रूप में उभरने की ओर अग्रसर है। यहां विशेषज्ञों की टीम काम करेगी।

जयपुर में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

राजधानी जयपुर में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मेंटल हैल्थ’ की स्थापना की जा रही है। यहाँ अत्याधुनिक काउंसलिंग और टेली-मेडिसिन जैसी आधुनिक सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।

इससे दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी विशेषज्ञों की सलाह आसानी से मिल सकेगी। इसके अलावा, प्रदेश के हर जिला मुख्यालय पर ‘मेंटल हेल्थ केयर सेल्स’ स्थापित किए जाएंगे।

इन सेल्स के जरिए नागरिकों को अपने ही जिले में विशेषज्ञ परामर्श, पुनर्वास और उचित उपचार सुलभ हो सकेगा। अब मरीजों को बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा।

टेली-मानस: संकट में आपका साथी

मानसिक तनाव या अवसाद से जूझ रहे लोगों के लिए ‘टेली-मानस’ हेल्पलाइन (14416 और 18008914416) एक वरदान साबित हो रही है। अब तक 71 हजार से अधिक लोग इसका लाभ उठा चुके हैं।

जयपुर और जोधपुर में यह सेवा निरंतर दी जा रही है। यह टोल-फ्री नंबर उन लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो अपनी बात किसी से साझा करने में संकोच करते हैं।

युवाओं और छात्रों पर विशेष ध्यान

आजकल के युवाओं में बढ़ते तनाव और आत्महत्या जैसी प्रवृत्तियों को रोकने के लिए शिक्षण संस्थानों में विशेष काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह एक बहुत जरूरी कदम है।

जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाने के लिए स्वास्थ्य मित्रों और आशा सहयोगिनियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। वे प्रारंभिक स्तर पर ही मानसिक रोगों की पहचान कर त्वरित उपचार सुनिश्चित करेंगी।

सरकार की इस दूरदर्शी पहल से न केवल मानसिक बीमारियों का इलाज होगा, बल्कि समाज में इसके प्रति फैली भ्रांतियां भी दूर होंगी। अब राजस्थान का हर नागरिक मानसिक रूप से सशक्त बनेगा।

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