जयपुर | राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। निर्वाचन आयोग ने 21 जून को रिक्त हो रही इन सीटों के लिए 18 जून को मतदान की तारीख तय कर दी है। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलना लगभग तय माना जा रहा है। इस घोषणा के साथ ही प्रदेश के गलियारों में सियासी हलचल तेज हो गई है।
चुनाव कार्यक्रम और सीटों का गणित
राज्यसभा चुनाव की आधिकारिक घोषणा के बाद राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। भाजपा के राजेंद्र गहलोत और रवनीत सिंह बिट्टू का कार्यकाल इसी महीने समाप्त हो रहा है।
कांग्रेस के नीरज डांगी का कार्यकाल भी पूरा होने जा रहा है। राजस्थान की कुल 10 राज्यसभा सीटों में से वर्तमान में भाजपा और कांग्रेस के पास पांच-पांच सदस्य मौजूद हैं।
निर्वाचन आयोग के अनुसार मतदान 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा। इसके तुरंत बाद मतगणना होगी। इस चुनाव से उच्च सदन में दलों की स्थिति बदल जाएगी।
भाजपा की रणनीति: सोशल इंजीनियरिंग पर जोर
भाजपा इस बार केवल राजनीतिक समीकरणों पर ध्यान नहीं दे रही है। पार्टी आलाकमान वैचारिक और सामाजिक संदेश देने की तैयारी में है। इसमें हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का तड़का भी होगा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को उम्मीदवारों के चयन का अधिकार दिया गया है। पार्टी ओबीसी, एमबीसी और मूल ओबीसी वर्ग को साधने की बड़ी रणनीति पर काम कर रही है।
संघ और विचार परिवार से जुड़े कुछ नए नाम अचानक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। भाजपा संगठन के जरिए जमीनी स्तर पर पकड़ रखने वाले चेहरों को प्राथमिकता देना चाहती है।
भाजपा के संभावित उम्मीदवारों की सूची
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को पार्टी दोबारा मौका दे सकती है। वे दिल्ली नेतृत्व के काफी करीब माने जाते हैं। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया का नाम भी रेस में काफी आगे है।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और समाजसेवी नरसी कुलरिया के नामों पर भी मंथन जारी है। भजन गायक प्रकाश माली को संघ विचारधारा के कोटे से उम्मीदवार बनाया जा सकता है।
राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर और पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ये नेता लगातार दिल्ली में आलाकमान और संघ के संपर्क में बने हुए हैं।
कांग्रेस में 'स्थानीय बनाम बाहरी' का मुद्दा
कांग्रेस खेमे में फिलहाल शांति दिख रही है, लेकिन अंदरूनी तौर पर खींचतान जारी है। पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल स्थानीय नेताओं को प्राथमिकता देने का बना हुआ है।
"राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों का चयन पार्टी आलाकमान द्वारा किया जाएगा। हम राजस्थान के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले मजबूत चेहरों को प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
प्रदेश की 10 में से 5 सीटों पर फिलहाल कांग्रेस के सदस्य हैं। इनमें से चार सदस्य राजस्थान के बाहर के रहने वाले हैं। स्थानीय कार्यकर्ता इस बार राजस्थानी चेहरे की मांग कर रहे हैं।
कांग्रेस के प्रमुख दावेदार
मौजूदा सांसद नीरज डांगी दोबारा मौका पाने के लिए प्रयासरत हैं। वे अपनी सक्रियता के दम पर आलाकमान को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। पवन खेड़ा का नाम भी चर्चा में है।
एआईसीसी महासचिव जितेंद्र सिंह भी एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरे हैं। अल्पसंख्यक वर्ग से जुड़े कुछ नेता भी दिल्ली स्तर पर अपनी पैरवी करने में जुटे हुए हैं।
निष्कर्ष: राजस्थान की सियासत पर असर
यह चुनाव राजस्थान की राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगा। भाजपा जहां अपने सामाजिक आधार को विस्तार देना चाहती है, वहीं कांग्रेस अपनी एकजुटता साबित करने की कोशिश करेगी।
टिकटों के वितरण से यह साफ हो जाएगा कि दोनों दल आगामी चुनावों के लिए क्या संदेश देना चाहते हैं। 18 जून के नतीजे प्रदेश की सत्ता और विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
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