सवाई माधोपुर | राजस्थान की महत्वपूर्ण रामजल सेतु लिंक परियोजना वर्तमान में सियासी गणित में उलझती नजर आ रही है। सवाई माधोपुर क्षेत्र में प्रस्तावित डूंगरी बांध को लेकर प्रदेश सरकार अब 'सतर्क' मोड में आ गई है।
चुनावों का असर और सरकार की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए सरकार किसी भी तरह के बड़े स्थानीय विवाद से बचना चाहती है। पूर्व में हुए भारी विरोध के बाद अब हर कदम सोच-समझकर उठाया जा रहा है। सरकार नहीं चाहती कि राजनीतिक कारणों से परियोजना का यह अहम हिस्सा विवादों में आए। इसी कारण अधिकारियों को फिलहाल इस पर धीमी गति से काम करने के मौखिक संकेत दिए गए हैं।
बांध की विशाल क्षमता और डिजाइन
बनास नदी पर प्रस्तावित डूंगरी बांध की क्षमता 1588 एमसीएम तय की गई है। यह क्षमता प्रसिद्ध बीसलपुर बांध से लगभग डेढ़ गुना अधिक है, जो इसे राज्य के जल प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। वर्ष 2017 की सर्वे रिपोर्ट के बाद इसके डिजाइन में बदलाव किया गया है। इसका भराव तल 230 मीटर से घटाकर 227.50 मीटर किया गया है, ताकि कम से कम क्षेत्र जलमग्न हो।
प्रभावित गांव और पुनर्वास योजना
परियोजना से कुल 16 गांव प्रभावित होने की संभावना है, जिनमें 4387 मकान शामिल हैं। इनमें से 9 गांव ऐसे हैं जिनकी आबादी 70 से 100 प्रतिशत तक प्रभावित होगी। प्रभावित होने वाले मुख्य क्षेत्रों में निम्नलिखित गांव शामिल हैं:
- बनास नदी किनारे: बढ़ोलास, बिलोली, डूंगरी और खिदरपुर।
- मोरेल नदी किनारे: सामोली, सांकड़ा, हाड़ौती और बड़ोडा।
- सपोटरा नाले के पास: रूपपुरा, पदमपुरा और किराड़ी।
वन्यजीव और पर्यावरणीय चिंताएं
यह बांध रणथंभौर और कैलादेवी वाइल्डलाइफ सेंचुरी की पहाड़ियों के बीच स्थित है। ग्लोबल टाइगर फोरम की वाइल्ड लाइफ स्टडी यहां पूरी हो चुकी है, क्योंकि बांध से संरक्षित क्षेत्रों का कुछ हिस्सा प्रभावित होगा।
मंत्री का आश्वासन
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि यह परियोजना राज्य के लिए भविष्य की जीवनरेखा है। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उचित मुआवजे का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। चुनावों के बाद इस परियोजना में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, देरी के कारण प्रोजेक्ट की कुल लागत बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।