जयपुर | राजस्थान सरकार आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह संकल्पित नजर आ रही है। इसी क्रम में ग्रामीण विकास विभाग के शासन सचिव श्री कृष्ण कुणाल ने शासन सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) कंट्रोल रूम का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य विभाग से संबंधित जन शिकायतों के निस्तारण की स्थिति की समीक्षा करना और देरी के कारणों का पता लगाना था। निरीक्षण के दौरान शासन सचिव ने जन शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले चार कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के कड़े आदेश दिए। शासन सचिव का यह औचक निरीक्षण राज्य सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसमें आमजन की समस्याओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
लापरवाही पर गिरी गाज, 4 कार्मिक निलंबित
शासन सचिव ने निरीक्षण के दौरान पाया कि कुछ क्षेत्रों में महात्मा गांधी नरेगा के जॉब कार्ड जारी करने में जानबूझकर देरी की जा रही थी। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उन्होंने टोंक जिले की ग्राम पंचायत सीन्दरा के कनिष्ठ सहायक रामसागर मीणा को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही ब्यावर जिले की ग्राम पंचायत सेवरिया के ग्राम विकास अधिकारी जितेन्द्र छाबा और कनिष्ठ सहायक रामदेव चौधरी के विरुद्ध भी निलंबन की कार्रवाई की गई। इन कार्मिकों पर आरोप है कि इन्होंने जॉब कार्ड के आवेदनों पर महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं की। जोधपुर के बिलाड़ा में राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण में कोताही बरतने पर वरिष्ठ सहायक इन्द्रसिंह को भी सस्पेंड किया गया। इन्द्रसिंह पर पोर्टल पर दर्ज परिवादों के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण में लापरवाही बरतने का आरोप था। शासन सचिव ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना सुशासन की पहली शर्त है और इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं होनी चाहिए।
परिवादियों से सीधा संवाद और त्वरित समाधान
श्री कृष्ण कुणाल ने निरीक्षण के दौरान टोंक के शिवराज और ब्यावर के शेरसिंह जैसे कई परिवादियों से फोन पर सीधा संवाद किया। परिवादियों ने बताया कि आवेदन के महीनों बाद भी उन्हें नरेगा जॉब कार्ड उपलब्ध नहीं कराए गए थे, जो कि गंभीर लापरवाही है। शासन सचिव ने परिवादियों की व्यथा सुनी और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी समस्या का समाधान तुरंत किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जॉब कार्ड वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ फौजदारी मामला भी दर्ज किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आमजन के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। शासन सचिव ने निर्देश दिए कि सभी लंबित प्रकरणों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि शिकायतों का केवल कागजों पर निस्तारण नहीं होना चाहिए, बल्कि धरातल पर परिवादी को संतुष्टि मिलनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को पोर्टल पर दर्ज फीडबैक की नियमित निगरानी करने के भी निर्देश दिए।
आवास योजना और तकनीकी बाधाओं का समाधान
निरीक्षण के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) से संबंधित शिकायतों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। नागौर के परिवादी राजाराम ने आवास की तीसरी किश्त मिलने में हो रही देरी की शिकायत सचिव से साझा की। जांच में सामने आया कि आधार ऑथेन्टिकेशन पूर्ण न होने के कारण राशि का हस्तांतरण तकनीकी रूप से अटका हुआ था। इस पर सचिव ने संबंधित अधिकारियों को 7 दिन के भीतर तकनीकी समस्या को हल कर राशि हस्तांतरित करने के निर्देश दिए। सचिव ने अधिकारियों को तकनीकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने और लाभार्थियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि तकनीकी कारणों से किसी गरीब का आवास निर्माण नहीं रुकना चाहिए। इसके लिए उन्होंने जिला स्तर पर आईटी टीम को और अधिक सक्रिय करने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक बिना किसी बाधा के पहुंचना चाहिए।
95% शिकायतों का हुआ सफल निस्तारण
राजस्थान संपर्क पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण विकास विभाग ने शिकायतों के समाधान में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। पिछले एक वर्ष में विभाग को कुल 57,743 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 55,339 यानी लगभग 95 प्रतिशत का निस्तारण कर दिया गया है। मनरेगा से जुड़ी 57,077 शिकायतों में से 54,387 का समाधान किया जा चुका है, जो विभाग की सक्रियता को दर्शाता है। विभाग में शिकायतों के निस्तारण की औसत अवधि मात्र 14 दिन है, जिसे और कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सचिव ने इस उपलब्धि की सराहना की लेकिन साथ ही कहा कि हमारा लक्ष्य शत-प्रतिशत निस्तारण और पूर्ण संतुष्टि होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो 5 प्रतिशत मामले लंबित हैं, उनकी समीक्षा की जाए और उनके समाधान में आ रही बाधाओं को दूर किया जाए। विभाग द्वारा शिकायतों के निस्तारण की गति को बनाए रखने के लिए अब साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी।
विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश
श्री कुणाल ने विभाग के 10 प्रमुख विषयों की समीक्षा करते हुए नई योजनाओं को भी पोर्टल पर जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर दर्ज हर मामले में संबंधित कार्मिक की जवाबदेही तय की जानी चाहिए ताकि कार्य संस्कृति में सुधार हो। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बारां, बूंदी, झालावाड़, हनुमानगढ़ और सिरोही जैसे जिलों के परिवादियों से भी बात कर उनकी समस्याएं सुनीं। मौके पर ही अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे फील्ड में जाकर समस्याओं का वास्तविक समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण के बाद परिवादी से संतुष्टि का फीडबैक अनिवार्य रूप से लिया जाए। यदि परिवादी संतुष्ट नहीं है, तो उस केस को दोबारा खोला जाए और उच्च अधिकारियों द्वारा उसकी समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों को बढ़ाया जाए ताकि लोगों को 181 हेल्पलाइन के बारे में अधिक जानकारी मिल सके।
मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप कार्य
यह निरीक्षण मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के उन निर्देशों का हिस्सा है जिसमें सभी विभागों के सचिवों को जनसुनवाई के आदेश दिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि नागरिकों को अपनी समस्याओं के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और घर बैठे समाधान मिले। इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त (मनरेगा) श्री जुगल किशोर मीणा और परियोजना निदेशक श्री अजय कुमार आर्य सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। शासन सचिव ने अंत में दोहराया कि विभाग का मुख्य उद्देश्य अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे संवेदनशीलता के साथ कार्य करें और सुनिश्चित करें कि राजस्थान संपर्क पोर्टल जनसेवा का एक सशक्त माध्यम बना रहे। राज्य सरकार की इस पहल से न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि आमजन का प्रशासन पर भरोसा भी मजबूत हुआ है।