जयपुर | राजस्थान सरकार आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए तकनीक और व्यक्तिगत संवाद का सहारा ले रही है। इसी कड़ी में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दिनेश कुमार ने शासन सचिवालय में राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) का गहन निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभागीय प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि पालनहार और पेंशन जैसी योजनाएं प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा का मजबूत ढांचा तैयार कर रही हैं। इनके सफल क्रियान्वयन के लिए शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है।
जनता से सीधा संवाद और जमीनी फीडबैक
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने केवल फाइलों का अवलोकन नहीं किया, बल्कि स्वयं कंट्रोल रूम में बैठकर परिवादियों से फोन पर बात की। उन्होंने डीग जिले के विष्णु से पालनहार योजना के बारे में विस्तृत जानकारी ली और उनकी समस्या सुनी।
इसी तरह बारां जिले के कमल मेहता से मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना के लंबित भुगतान के संबंध में चर्चा की। उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन समस्याओं का समाधान तुरंत सुनिश्चित किया जाए ताकि लाभार्थियों को परेशानी न हो।
दिनेश कुमार ने कहा कि परिवादियों से संवाद के दौरान केवल शिकायत की जानकारी न लें। बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे पहलुओं पर भी बात करें। इससे योजना की वास्तविक उपयोगिता का सही आकलन संभव हो सकेगा।
डिजिटल समाधान: समाधान साथी व्हाट्सएप चैटबॉट
आमजन की सुविधा के लिए विभाग ने ‘समाधान साथी’ व्हाट्सएप चैटबॉट शुरू किया है। एसीएस ने निर्देश दिए कि हर परिवादी को इस सुविधा के बारे में बताया जाए। लोग 7690080055 नंबर पर संदेश भेजकर घर बैठे जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
इस चैटबॉट के माध्यम से पेंशन, छात्रवृत्ति और अन्य आवेदनों की स्थिति जांची जा सकती है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तकनीक के व्यापक उपयोग से हेल्पलाइन पर आने वाले प्रकरणों का बोझ कम होगा और निस्तारण में तेजी आएगी।
शिकायतों के निस्तारण में गुणवत्ता पर जोर
एसीएस ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि शिकायतों के जवाब में केवल औपचारिकता न निभाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवादी को दिए जाने वाले उत्तर तथ्यात्मक और स्पष्ट होने चाहिए। भ्रामक जवाबों से विभाग की छवि प्रभावित होती है।
शिकायतों के निस्तारण में केवल औपचारिक रिस्पॉन्स देने से बचा जाए। इसके स्थान पर परिवादी को स्पष्ट एवं तथ्यात्मक उत्तर दिए जाएं ताकि उन्हें सही स्थिति का पता चल सके।
बैंक मर्जर के कारण कई लाभार्थियों के भुगतान अटक गए हैं। इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए उन्होंने विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी प्रकरणों की पहचान कर उनका शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए।
शानदार प्रदर्शन: 97 प्रतिशत शिकायतों का समाधान
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में विभाग के पास कुल 3,05,918 प्रकरण दर्ज हुए। इनमें से 2,96,107 शिकायतों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया है, जो कि कुल शिकायतों का लगभग 97 प्रतिशत है।
हैरानी की बात यह है कि इन प्रकरणों के निस्तारण में औसतन केवल 13 दिन का समय लगा। आंकड़ों के मुताबिक 71.29 प्रतिशत परिवादियों ने विभाग की इस त्वरित कार्रवाई पर पूर्ण संतोष व्यक्त किया है।
अंत में उन्होंने केंद्र सरकार के सीपीग्राम पोर्टल के साथ समन्वय करने की बात कही। उन्होंने कहा कि लंबित प्रकरणों के समाधान में आने वाली तकनीकी बाधाओं को दूर करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। इस निरीक्षण से विभागीय कार्यप्रणाली में नई ऊर्जा आएगी।
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