जयपुर | राजस्थान सरकार आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए अब पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रही है। जल जीवन मिशन के निदेशक राजन विशाल ने हेल्पलाइन का निरीक्षण किया। उन्होंने शासन सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) कंट्रोल रूम में विभागीय प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की। अधिकारियों को शिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के कड़े निर्देश दिए गए हैं। राजन विशाल ने जोर देकर कहा कि शिकायतों के निस्तारण में लगने वाले औसत समय को और कम किया जाए। उन्होंने हर पखवाड़े में लंबित मामलों की गहन समीक्षा करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाधान की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इससे सरकारी सेवाओं के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन का निरीक्षण: राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन: 181 पर शिकायतों का होगा त्वरित समाधान
मिशन निदेशक राजन विशाल ने 181 कंट्रोल रूम का जायजा लिया और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।
HIGHLIGHTS
- मिशन निदेशक राजन विशाल ने राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) कंट्रोल रूम का औचक निरीक्षण किया।
- पिछले एक वर्ष में पीएचईडी से जुड़े 95.93 प्रतिशत प्रकरणों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया है।
- अधिकारियों को हर 15 दिन में शिकायतों की समीक्षा करने और निस्तारण समय कम करने के निर्देश।
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर सचिव स्तर के अधिकारी सीधे परिवादियों से संवाद कर रहे हैं।
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शिकायतों के निस्तारण में तेजी और पारदर्शिता
जिला स्तर पर दर्ज शिकायतों की स्थिति पर विशेष ध्यान देते हुए उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी स्वयं परिवादियों से संवाद करें। इससे समस्या का सही फीडबैक मिल सकेगा। जिन जिलों में निस्तारण प्रतिशत और संतुष्टि का स्तर राज्य औसत से कम है, वहां तत्काल सुधार की योजना बनाई जाए। अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि शिकायतों के समाधान में केवल गति ही नहीं, बल्कि काम की गुणवत्ता भी मायने रखती है। लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के आदेश दिए गए।
शिकायतों के समाधान में गुणवत्ता और गति दोनों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है ताकि आमजन को वास्तविक राहत मिल सके।
पीएचईडी विभाग की प्रभावी कार्यप्रणाली
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बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में पीएचईडी से जुड़े कुल 5 लाख 45 हजार 840 प्रकरण दर्ज हुए। इनमें से 5 लाख 20 हजार 469 का निस्तारण हुआ। विभाग की सफलता दर लगभग 95.93 प्रतिशत रही है, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इन मामलों के समाधान में औसतन मात्र 15 दिन का समय लगा है। रिपोर्ट के अनुसार, 60 प्रतिशत परिवादियों ने विभाग द्वारा किए गए समाधान पर अपनी संतुष्टि व्यक्त की है। शेष मामलों को भी जल्द सुलझाने के प्रयास जारी हैं।
मुख्यमंत्री की पहल और सीधा संवाद
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार अब सभी विभागों के सचिव निर्धारित तिथियों पर कंट्रोल रूम में उपस्थित रहते हैं। वे सीधे परिवादियों से फोन पर बात कर रहे हैं। इस पहल के माध्यम से राजस्थान के नागरिक अब घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज करा रहे हैं। उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। निरीक्षण के दौरान राजन विशाल ने स्वयं कई परिवादियों से फोन पर संवाद किया। उनकी समस्याओं को सुनकर मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस दौरान उपस्थित रहे और उन्होंने फीडबैक लिया। इस सक्रियता से सरकारी मशीनरी में जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इस प्रकार की नियमित समीक्षा और सीधा संवाद शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाता है। आमजन को समय पर राहत मिलना ही इस पूरी कवायद का मुख्य और अंतिम उद्देश्य है।
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