राजस्थान

राजस्थान में महकेगा चंदन का वन: राजस्थान के 3 जिलों में विकसित होंगे विशाल चंदन वन

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 04 मई 2026, 10:50 दोपहर
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बांसवाड़ा, उदयपुर और सिरोही में चंदन वन विकसित करने के निर्देश दिए।

जयपुर | राजस्थान की धरती अब चंदन की खुशबू से महकने वाली है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश की वन संपदा को समृद्ध करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने बांसवाड़ा, उदयपुर और सिरोही में विशेष चंदन वन विकसित करने की योजना को हरी झंडी दे दी है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि बांसवाड़ा के झांतलिया, उदयपुर के बांकी और सिरोही के जनापुर में ये वन तैयार किए जाएंगे। प्रत्येक स्थान पर 10 हजार से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले चंदन के पौधे रोपित किए जाएंगे।

तीन जिलों में लगेंगे 10 हजार से ज्यादा पौधे

इन पौधों की सुरक्षा के लिए चयनित क्षेत्रों में मजबूत फेंसिंग की जाएगी। साथ ही, सिंचाई के लिए भी पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मानसून से पहले सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार का लक्ष्य केवल हरियाली बढ़ाना ही नहीं, बल्कि किसानों की जेब भरना भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय में वृद्धि के लिए उन्हें फलदार पौधे उपलब्ध करवाए जाएंगे।

किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष फोकस

वन विभाग को अब फलदार पौधों के वितरण के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में इन चंदन वनों की स्थापना से राजस्थान की वन-धन संपदा और अधिक समृद्ध होगी।

तकनीक का इस्तेमाल और जन भागीदारी

पहाड़ी और दुर्गम वन क्षेत्रों में हरियाली फैलाने के लिए अब तकनीक का सहारा लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अरावली क्षेत्र में ड्रोन सीडिंग के जरिए सघन वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए हैं।

'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत राजस्थान ने बड़े लक्ष्य तय किए हैं। वर्ष 2024 में 7 करोड़ और 2025 में 11 करोड़ पौधे लगाने का संकल्प लिया गया है। इस साल 10 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री ने इस अभियान को एक जन आंदोलन बनाने की बात कही है। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों और आम लोगों से इस नेक कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया है ताकि राजस्थान हरा-भरा बन सके।

यह योजना राजस्थान के पारिस्थितिकी तंत्र को बदलने वाली साबित होगी। चंदन वनों के सफल क्रियान्वयन के बाद राज्य के अन्य जिलों में भी इसकी संभावनाएं तलाशी जाएंगी, जिससे प्रदेश की पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगी।

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