जयपुर |
राजस्थान में सरगरा समाज ने अपनी जाति के नाम में एक लिपिकीय त्रुटि को लेकर गंभीर चिंता और रोष व्यक्त किया है। समाज का आरोप है कि सरकारी दस्तावेजों में उनके जाति के नाम 'सरगरा' (Sargara) को गलत तरीके से 'सरगड़ा' (Sargada) लिखा जा रहा है, जिससे उनकी पहचान के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
इस मुद्दे को लेकर समाज ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें तत्काल सुधार की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला?
सरगरा समाज के अनुसार, केंद्र सरकार के मूल आदेश, 'Constitution (Scheduled Castes) Order, 1950' और राजस्थान की अनुसूचित जाति की सूची, दोनों में क्रम संख्या 55 पर उनका नाम अंग्रेजी में 'Sargara' ही दर्ज है।
यहां तक कि 2011 की जनगणना के रिकॉर्ड में भी यही स्पेलिंग इस्तेमाल की गई है। समाज का कहना है कि संसद द्वारा अधिसूचित सूची में आज तक 'सरगरा' ही है, फिर 'सरगड़ा' कहां से आया?
तकनीकी चूक या लापरवाही?
ज्ञापन में बताया गया है कि यह बदलाव राज्य सरकार द्वारा किसी कानून के तहत नहीं किया गया है, बल्कि यह हिंदी अनुवाद और ऑनलाइन पोर्टल पर टाइपिंग की गलती का नतीजा है।
सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग, जयपुर द्वारा अनुसूचित जाति की सूची में क्रम 55 पर दर्ज सरगरा जाति को हिंदी में 'सरगड़ा' लिख दिया गया है।
इसी वजह से ई-मित्र से बनने वाले जाति प्रमाण पत्रों में भी यही गलत नाम प्रिंट होकर आ रहा है, जिससे समाज के लोगों को भारी असुविधा हो रही है।
त्रुटि के पीछे के संभावित कारण
समाज ने इस गलती के पीछे कुछ मुख्य कारण बताए हैं:
- लिप्यंतरण की गलती: अंग्रेजी से हिंदी में लिप्यंतरण करते समय 'Sargara' को लिखते समय टाइपिस्ट अक्सर 'रा' को 'ड़ा' कर देते हैं, क्योंकि कंप्यूटर फॉन्ट में 'र' और 'ड़' पास-पास होते हैं।
- कॉपी-पेस्ट सिस्टम: एक बार सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT) के मास्टर डेटा में 'सरगड़ा' फीड हो गया, तो पूरे राजस्थान के ई-मित्र और जन आधार पोर्टलों पर वही गलत नाम दिखने लगा।
समाज का कहना है कि यह कोई सरकारी त्रुटि नहीं, बल्कि प्रशासनिक और तकनीकी चूक व लापरवाही का परिणाम है, जिसे सुधारने की मांग अब जोर पकड़ रही है।
2023 से जारी है संघर्ष
सरगरा समाज इस लिपिकीय त्रुटि को सुधारने के लिए वर्ष 2023 से लगातार आवाज उठा रहा है।
इस संबंध में जिला कलेक्टर, विधायक, सांसद, और तहसील कार्यालयों से लेकर विधानसभा तक में यह मुद्दा उठाया गया, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं निकला है, जिससे समाज में काफी रोष व्याप्त है।
समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी
मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि वे केवल अपने सम्मानजनक नाम के लिए मांग कर रहे हैं ताकि किसी भी व्यक्ति को हीन भावना से न गुजरना पड़े।
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि 17 अगस्त 2026 तक सरकारी डेटा में 'सरगड़ा' के स्थान पर 'सरगरा' अंकित नहीं किया जाता है, तो सरगरा समाज द्वारा पूरे प्रदेश में उग्र धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
इसके साथ ही, जयपुर में विधानसभा का घेराव करने की भी चेतावनी दी गई है। समाज ने मुख्यमंत्री से इस मामले पर शीघ्र ध्यान देकर संशोधन के आदेश प्रदान करने का आग्रह किया है।
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