जयपुर | राजस्थान के सरकारी स्कूलों में छुट्टियों को लेकर एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी आगामी सत्र के कैलेंडर ने प्रदेश के लाखों शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है।
राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) ने छुट्टियों में की गई कटौती के खिलाफ अब सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है। जयपुर में आयोजित प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा की गई।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण अवकाश और संस्था प्रधानों के विवेकाधीन अवकाशों में कटौती करना शिक्षकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। इसके विरोध में आंदोलन की घोषणा की गई है।
आंदोलन की पूरी रूपरेखा और तारीखें
संघ के निर्णय के अनुसार, विरोध की शुरुआत 7 अप्रैल से होने जा रही है। इस दिन प्रदेश के सभी शिक्षक स्कूलों में काली पट्टी बांधकर अपना काम करेंगे और सरकार को अपना संदेश देंगे।
खास बात यह है कि शिक्षक शिक्षण कार्य को बाधित नहीं करेंगे, लेकिन अपना विरोध स्पष्ट रूप से दर्ज कराएंगे। इसके बाद 8 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर उपखंड अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
आंदोलन का अगला चरण 20 अप्रैल को होगा, जब जिला स्तर पर जिला कलेक्टरों के माध्यम से मुख्यमंत्री तक शिक्षकों की मांगें पहुंचाई जाएंगी। शिक्षक अपनी पुरानी छुट्टियों की बहाली की मांग पर अड़े हैं।
18 मई को रामगंज मंडी में शक्ति प्रदर्शन
यदि सरकार ने जल्द ही इस मुद्दे पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और भी उग्र किया जाएगा। संघ ने चेतावनी दी है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे।
इसी कड़ी में 18 मई को शिक्षा मंत्री के गृह क्षेत्र रामगंज मंडी (कोटा) में एक विशाल शिक्षक रैली का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रदेश के कोने-कोने से हजारों शिक्षकों के शामिल होने की उम्मीद है।
शिक्षक संघ का मानना है कि छुट्टियों में कटौती से शिक्षकों के सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर नकारात्मक असर पड़ता है। वे चाहते हैं कि विभाग अपने इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करे।
क्या है नया शिविरा पंचांग 2026-27?
शिक्षा विभाग, राजस्थान ने सत्र 2026-27 के लिए शिविरा पंचांग जारी किया है, जिसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा शीतकालीन अवकाश की तारीखों में बदलाव को लेकर हो रही है।
पहले सर्दियों की छुट्टियां 25 दिसंबर से शुरू होती थीं, लेकिन नए कैलेंडर के अनुसार अब ये 31 दिसंबर 2026 से शुरू होकर 10 जनवरी 2027 तक रहेंगी। इससे शिक्षकों और छात्रों में असमंजस है।
इसके अलावा, ग्रीष्मकालीन अवकाश यानी गर्मियों की छुट्टियों की अवधि में भी कटौती की गई है। आगामी सत्र में गर्मी की छुट्टियां 17 मई से शुरू होकर केवल 20 जून 2026 तक ही रहेंगी।
244 दिन संचालित होंगे विद्यालय
शिक्षा विभाग का तर्क है कि इन बदलावों से शैक्षणिक समय में बढ़ोतरी होगी। नए पंचांग के अनुसार, पूरे सत्र में कुल 244 दिन विद्यालय संचालित किए जाएंगे, जिससे पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो सकेगा।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सभी राजकीय, गैर-राजकीय, आवासीय विद्यालयों और प्रशिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक गतिविधियां इसी नए कैलेंडर के अनुसार ही संचालित की जाएंगी।
इस बार दीपावली के समय मिलने वाला मध्यावधि अवकाश 4 नवंबर से 15 नवंबर 2026 तक निर्धारित किया गया है। विभाग का मानना है कि यह त्योहार मनाने के लिए पर्याप्त समय है।
शिक्षकों और विभाग के बीच बढ़ता टकराव
शिक्षा विभाग का मानना है कि शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए कार्य दिवसों का बढ़ना जरूरी है। वहीं, शिक्षक इसे अपने अवकाशों पर हमला मान रहे हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया है।
नए कैलेंडर में 32 उत्सवों को भी शामिल किया गया है, जिन्हें स्कूलों में धूमधाम से मनाया जाएगा। लेकिन शिक्षकों का मुख्य ध्यान उन छुट्टियों पर है जो कम कर दी गई हैं।
अब देखना यह होगा कि 18 मई की प्रस्तावित रैली और अप्रैल में होने वाले विरोध प्रदर्शनों का सरकार पर क्या असर पड़ता है। क्या शिक्षा विभाग अपने फैसले में कोई बदलाव करेगा या टकराव और बढ़ेगा।