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स्कूलों में अब 'रीडिंग पीरियड': राजस्थान के स्कूलों में 7वां कालांश अब होगा 'रीडिंग पीरियड'

महेन्द्रसिंह शेखावत · 01 अक्टूबर 2026, 05:23 शाम
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने प्रदेश के विद्यालयों में प्रतिदिन 7वां कालांश ‘रीडिंग पीरियड’ के रूप में संचालित करना अनिवार्य किया है, जिसमें पांच अलग गतिविधियां होंगी।

बीकानेर | राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत राजस्थान के विद्यालयों में विद्यार्थियों के बुनियादी ज्ञान और पठन कौशल को विकसित करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

अब प्रदेश के सभी स्कूलों में प्रतिदिन 7वां कालांश अनिवार्य रूप से ‘रीडिंग पीरियड’ के रूप में संचालित किया जाएगा।

विद्यार्थियों के लिए 'रीडिंग पीरियड' अनिवार्य

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने प्रदेश के विद्यालयों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब हर स्कूल में 7वां कालांश केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगा।

इसे 'स्ट्रक्चर रीडिंग सपोर्ट पीरियड' के रूप में विकसित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पठन-बोध और अभिव्यक्ति की क्षमता को बढ़ाना है।

एनईपी-2020 के तहत नई पहल

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को पूरा करने की दिशा में एक कदम है। इससे विद्यार्थियों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान का विकास होगा।

शिक्षा विभाग चाहता है कि छात्र केवल किताबें न पढ़ें, बल्कि उन पर चिंतन करें। उन्हें अपने विचार साझा करने और चर्चा करने का पूरा अवसर मिले।

सप्ताह की पांच विशेष गतिविधियां

रीडिंग पीरियड के सफल संचालन के लिए सप्ताह में पांच अलग-अलग गतिविधियां तय की गई हैं। इन गतिविधियों को विद्यार्थियों के स्तर के अनुसार चुना जाएगा।

पठन सामग्री और चयन प्रक्रिया

रीडिंग पीरियड की सबसे खास बात यह है कि इसमें नियमित पाठ्यपुस्तकों का उपयोग नहीं किया जाएगा। इसके बजाय छात्रों की रुचि की सामग्री चुनी जाएगी।

शिक्षक विद्यार्थियों के लिए कहानी, कविता, जीवनी और मैगजीन उपलब्ध कराएंगे। इसके अलावा समाचार पत्रों की सामग्री का भी उपयोग किया जा सकता है।

प्रत्येक विद्यार्थी को सप्ताह में कम से कम एक बार सस्वर पठन का मौका मिलेगा। इसके लिए शिक्षकों को एक विशेष रोस्टर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

समय प्रबंधन और कालांश का ढांचा

रीडिंग पीरियड का कुल समय 30 से 35 मिनट निर्धारित किया गया है। इस समय को चार मुख्य भागों में विभाजित किया गया है ताकि अधिकतम लाभ मिल सके।

कालांश का विभाजन इस प्रकार होगा:

शिक्षक अपनी दैनिक डायरी में इन गतिविधियों की प्रविष्टि अनिवार्य रूप से करेंगे। इससे कार्यक्रम की निगरानी और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सकेगी।

कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष सहयोग

जिन विद्यार्थियों को पढ़ने में कठिनाई महसूस होती है, उनके लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। शिक्षक उनके लिए 'गाइडेड रीडिंग' का सत्र आयोजित करेंगे।

इसके अलावा 'बड्डी रीडिंग' के माध्यम से भी छात्रों को सहयोग दिया जाएगा। इसमें सहपाठियों की मदद से पठन कौशल को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।

यह नया ढांचा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होगा। इससे स्कूलों में सीखने का माहौल और अधिक रोचक और प्रभावी बनेगा।

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