बीकानेर |
राजस्थान में राजस्व, उपनिवेशन और सेटलमेंट जैसे महत्वपूर्ण विभागों का काम पटवारियों पर निर्भर है। इन विभागों में पटवारियों की नियुक्ति तो रेवेन्यू बोर्ड करता है, लेकिन सेटलमेंट विभाग के पटवारियों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
राज्य के सात सौ से अधिक सेटलमेंट पटवारी एक ही विभाग में सीमित होकर रह गए हैं, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा है।
ट्रांसफर पॉलिसी का अभाव
सेटलमेंट पटवारियों के लिए कोई स्पष्ट ट्रांसफर पॉलिसी नहीं होना उनके असंतोष का मुख्य कारण है। पदोन्नति और वरिष्ठता के मामलों में उन्हें राज्य स्तर पर अन्य पटवारियों के साथ मर्ज कर दिया गया है, लेकिन जब बात स्थानांतरण की आती है तो उनके लिए कोई नीति नहीं है।
एक विभाग तक सीमित करियर
भू प्रबंध विभाग में 2019 में अमीन का पद समाप्त कर पटवारी का पद बना दिया गया था। इसके बाद राजस्थान के सभी 41 जिलों को 11 कार्यालयों में समेटकर सात सौ से अधिक पटवारी नियुक्त किए गए।
इन पटवारियों से अमीन का काम लिया जा रहा है, जो सामान्य पटवारी के कार्य से अलग है। ये पटवारी जमीनों की स्थिति, उनका सेटलमेंट और नक्शों की सटीक तरमीम करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करते हैं, लेकिन वे शायद ही कभी तहसीलदार के पद तक पहुंच पाएंगे।
ट्रांसफर नीति में दोहरा मापदंड
एक बड़ा सवाल यह है कि जब सामान्य पटवारियों के ट्रांसफर रेवेन्यू बोर्ड करता है, तो सेटलमेंट पटवारियों के ट्रांसफर सेटलमेंट कमिश्नर द्वारा केवल उन्हीं 11 कार्यालयों के बीच क्यों किए जाते हैं?
राजस्व विभाग ने फरवरी 25 में सभी पटवारियों का काडर मर्ज कर दिया था, तो फिर ट्रांसफर नीति में यह दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है? इसलिए, इंटर-काडर ट्रांसफर की व्यवस्था लागू करना अत्यंत आवश्यक है।
पटवार संघ ने उठाई मांग
राजस्थान पटवार संघ ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। संघ ने राजस्थान के राजस्व सचिव टी रविकांत से मांग की है कि राजस्व, उपनिवेशन और भू प्रबंध विभाग के सभी पटवारियों को समकक्ष मानते हुए उनके स्थानांतरण किए जाएं।
इससे न केवल उनके पदोन्नति के रास्ते खुलेंगे, बल्कि उनकी योग्यता का लाभ तीनों विभागों को मिल सकेगा।
डिजिटलीकरण के दौर में उपेक्षा
एक तरफ देश में 'डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम' (DILRMP) चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस महत्वपूर्ण काम को करने वाले पटवारी उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
इस प्रोग्राम के तहत जयपुर में चौमूं, उदयपुर में आमेट, जोधपुर में पीपाड़, बाड़मेर में सिवाणा और टोंक में उनियारा जैसे क्षेत्र ऑनलाइन हो चुके हैं। राजस्थान में 'वन टू वन मैपिंग' का कार्य भी होना है, जिसमें पटवारियों की भूमिका अहम होगी।
नेतृत्वहीन सेटलमेंट विभाग
सेटलमेंट विभाग के प्रति राज्य सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभाग में न तो कोई पूर्णकालिक सेटलमेंट कमिश्नर है और न ही एडिशनल कमिश्नर। ये दोनों महत्वपूर्ण पद चार्ज पर चल रहे अधिकारियों के पास हैं, जिससे विभाग की सक्रियता पर सवाल उठना लाजिमी है।
सेटलमेंट एक बहुत ही महत्वपूर्ण विभाग है और इसे पूरी गंभीरता से लेना राजस्व विभाग की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।