बीकानेर |
राजस्थान में राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है कि कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहे। इस संबंध में, शिक्षा विभाग और जिला कलेक्टरों को इसे गंभीरता से लेने के निर्देश दिए गए हैं।
यह अभियान उन बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए चलाया जा रहा है जो प्रवेशोत्सव की अवधि समाप्त होने के बाद भी विभिन्न कारणों से स्कूल से बाहर हैं।
'एक शिक्षक-एक बच्चा, विद्यालय में भविष्य अच्छा'
शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने इस अभियान को लेकर गंभीर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आर्थिक, सामाजिक या अन्य कारणों से विद्यालय से बाहर रह गए बच्चों को शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के प्रावधानों के तहत स्कूलों में प्रवेश दिलाना और उन्हें नियमित अध्ययन से जोड़ना है।
निर्देशों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण अभियान की थीम "एक शिक्षक-एक बच्चा, विद्यालय में भविष्य अच्छा" रखी गई है, जो हर बच्चे तक शिक्षा पहुँचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
अभियान का दो चरणों में संचालन
यह राज्यव्यापी अभियान दो चरणों में संचालित किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक बच्चों तक इसकी पहुँच सुनिश्चित हो सके।
प्रथम चरण 26 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक चलेगा, जबकि द्वितीय चरण 16 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक संचालित होगा।
विशेष समूहों पर रहेगा ध्यान
अभियान के दौरान कुछ विशेष समूहों के बच्चों को विद्यालय से जोड़ने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
इनमें विशेष रूप से बालिकाएं, विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (दिव्यांग), बाल श्रमिक, और प्रवासी, आदिवासी एवं खानाबदोश समुदायों के बच्चे शामिल हैं।
प्रभावी मॉनिटरिंग और समीक्षा
अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी मॉनिटरिंग प्रणाली स्थापित की गई है।
निर्देशों में कहा गया है कि मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी प्रत्येक पखवाड़े में अभियान की प्रगति की समीक्षा करेंगे।
वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक एवं माध्यमिक) जिले की प्रगति पर लगातार निगरानी रखेंगे।
जिला कलेक्टर द्वारा भी समय-समय पर अभियान की समीक्षा की जाएगी। इसके तहत नियमित नामांकन की ट्रैकिंग, साप्ताहिक विद्यालय स्तरीय समीक्षा, पाक्षिक ब्लॉक स्तरीय समीक्षा और मासिक जिला स्तरीय समीक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
शत-प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य
राज्य सरकार ने जिला कलेक्टरों से अपेक्षा की है कि वे इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
उनसे कहा गया है कि वे उपखंड अधिकारियों, ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों और पंचायती राज प्रतिनिधियों को आवश्यक निर्देश देकर जिले में विद्यालय से बाहर रह गए बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन और ठहराव सुनिश्चित करें।
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