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सिरोही: SHO गंगा प्रसाद सस्पेंड: राजस्थान: सिरोही में जातिसूचक शब्द कहने पर SHO सस्पेंड, ऑडियो वायरल होने पर एसपी का बड़ा एक्शन

गणपत सिंह मांडोली · 04 अप्रैल 2026, 08:57 रात
राजस्थान के सिरोही जिले में कालन्द्री थाना प्रभारी गंगा प्रसाद को एक वायरल ऑडियो में जातिसूचक अपशब्दों का प्रयोग करने पर निलंबित कर दिया गया है। एसपी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने यह कार्रवाई सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल परमार के साथ तीखी बहस के बाद की है।

सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले में पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाली एक बड़ी घटना सामने आई है। कालन्द्री थाना प्रभारी (SHO) गंगा प्रसाद को उनके पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

एसपी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ की बड़ी कार्रवाई

सिरोही के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने यह कड़ा कदम उठाया है। SHO गंगा प्रसाद का एक विवादित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा था। इस ऑडियो में अधिकारी की भाषा और उनकी मानसिकता पर गंभीर सवाल उठे थे। पुलिस विभाग ने अनुशासनहीनता और गरिमा के उल्लंघन को देखते हुए यह निलंबन आदेश जारी किया है।

क्या है वायरल ऑडियो का पूरा मामला?

वायरल हुए ऑडियो में थाना प्रभारी गंगा प्रसाद और सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल परमार के बीच तीखी बहस सुनी जा सकती है। गोपाल परमार आजाद समाज पार्टी के राजस्थान प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। बातचीत के दौरान SHO ने मेघवाल समाज के खिलाफ अपमानजनक जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। जब परमार ने उन्हें टोका, तो अधिकारी ने माफी मांगने के बजाय अहंकार दिखाया।

'संविधान में लिखा है' जैसा बेतुका दावा

हैरानी की बात यह है कि SHO ने ऑडियो में दावा किया कि वह जो शब्द इस्तेमाल कर रहे हैं, वह संविधान में लिखा है। उन्होंने बार-बार उन अपशब्दों को दोहराया। अधिकारी ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय परमार से कहा कि वह दो नहीं बल्कि तीन बार ऐसा बोलेंगे। इस व्यवहार ने दलित संगठनों और आम जनता के बीच भारी रोष पैदा कर दिया।

गोपाल परमार की कड़ी चेतावनी

गोपाल परमार ने इस अपमान का कड़ा विरोध किया। उन्होंने ऑडियो में ही SHO को चेतावनी दी कि वह उनकी 'दारू उतार देंगे'। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब इसका इलाज संवैधानिक तरीके से होगा। परमार ने कहा कि अगर प्रशासन ने इस पर कार्रवाई नहीं की, तो वह आंदोलन करेंगे। उन्होंने पुलिस की इस कार्यशैली को पूरी तरह से अस्वीकार्य और गैर-कानूनी बताया।

जनता का आक्रोश और कानूनी मांग

SHO के निलंबन के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ है। विभिन्न संगठनों ने मांग की है कि आरोपी अधिकारी के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। पुलिस का काम न्याय देना है, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक की भाषा बोलने लगें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है। फिलहाल, विभाग मामले की विस्तृत जांच कर रहा है।

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