भरतपुर | राजस्थान में पेपर लीक और डमी कैंडिडेट नेटवर्क के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में एसओजी ने 10 हजार रुपये के इनामी अपराधी मनोहरलाल मांजू को धर दबोचा है।
सरकारी स्कूल का शिक्षक ही निकला जालसाज
हैरानी की बात यह है कि गिरफ्तार आरोपी मनोहरलाल मांजू खुद एक सरकारी शिक्षक है। वह जालोर जिले के रानीवाड़ा तहसील के एक प्राथमिक विद्यालय में लेवल-1 के पद पर कार्यरत था।
आरोपी ने 29 जनवरी 2023 को भरतपुर के एक परीक्षा केंद्र पर वरिष्ठ अध्यापक परीक्षा दी थी। उसने यह परीक्षा खुद के लिए नहीं, बल्कि किसी और के स्थान पर डमी कैंडिडेट बनकर दी थी।
RPSC परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा
एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि यह पूरा मामला आरपीएससी द्वारा आयोजित वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा) द्वितीय श्रेणी प्रतियोगी परीक्षा-2022 से संबंधित है। पेपर लीक के कारण यह परीक्षा दोबारा हुई थी।
जांच में खुलासा हुआ कि अनिल कुमार मीणा नामक अभ्यर्थी ने खुद परीक्षा देने के बजाय मनोहरलाल को बैठाया था। अनिल फर्जीवाड़े से सीनियर टीचर (साइंस) बन गया था, जिसे पुलिस पहले ही पकड़ चुकी है।
तकनीकी टीम ने ऐसे दबोचा
एसओजी के पास शुरुआत में केवल संदिग्धों की धुंधली तस्वीरें थीं। तकनीकी टीम ने आधुनिक फोटो-मैचिंग तकनीक और गहन पड़ताल के जरिए मनोहरलाल की सही पहचान सुनिश्चित की और उसे गिरफ्तार किया।
इस साजिश का मुख्य सूत्रधार दर्शन लाल मीणा उर्फ रामप्रकाश मीणा बताया जा रहा है। उसने ही डमी परीक्षार्थियों का पूरा नेटवर्क तैयार किया था और सौदा तय किया था।
"पूछताछ में दूसरे डमी परीक्षार्थियों, दलालों और इस गिरोह से जुड़ी और भी अहम जानकारी मिल सकती है। मामले की जांच अभी जारी है।" - विशाल बंसल, एडीजी एसओजी
एसओजी अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और दलालों की तलाश में छापेमारी कर रही है। यह मामला दिखाता है कि कैसे सिस्टम के अंदर बैठे लोग ही परीक्षाओं की शुचिता को भंग कर रहे हैं।
आरोपी शिक्षक के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की भी सिफारिश की जाएगी। राजस्थान सरकार पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है ताकि युवाओं का भरोसा बना रहे।
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