जयपुर | राजस्थान ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) ने प्रदेश के विद्युत वितरण निगमों की ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में की गई मेहनत की जमकर तारीफ की है।
राजस्थान का सोलर जलवा: राजस्थान के सोलर मॉडल की दुनिया में धूम, ISA ने की तारीफ
इंटरनेशनल सोलर अलायंस ने राजस्थान के बिजली निगमों की सौर ऊर्जा उपलब्धियों को सराहा है।
HIGHLIGHTS
- इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) ने राजस्थान के विद्युत वितरण निगमों की वैश्विक स्तर पर सराहना की है।
- राजस्थान ने पीएम कुसुम योजना के तहत 4 हजार मेगावाट से अधिक विकेन्द्रित सौर ऊर्जा क्षमता हासिल की है।
- जयपुर डिस्कॉम की ग्रिड डिजिटाइजेशन पहल को अफ्रीकी देशों के लिए अनुकरणीय मॉडल बताया गया है।
- प्रदेश का लक्ष्य इस साल के अंत तक सौर ऊर्जा क्षमता को 10 हजार मेगावाट तक पहुँचाने का है।
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वैश्विक मंच पर राजस्थान का डंका
ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने वाले 126 देशों के संगठन आईएसए ने राजस्थान की सक्सेस स्टोरी को दुनिया के सामने रखा है। जयपुर डिस्कॉम द्वारा ग्रिड डिजिटाइजेशन के लिए अपनाई गई तकनीक अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।आईएसए के महानिदेशक आशीष खन्ना ने राजस्थान डिस्कॉम्स की उपलब्धियों को अफ्रीकी देशों के लिए एक मिसाल बताया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से राजस्थान ने विकेन्द्रित सौर ऊर्जा को अपनाया है, वह अन्य देशों के लिए सीखने लायक है।
पीएम कुसुम योजना में मिली बड़ी कामयाबी
मंगलवार को विद्युत भवन में हुई बैठक के दौरान बताया गया कि राजस्थान ने पीएम कुसुम योजना के माध्यम से 4 हजार मेगावाट से अधिक क्षमता हासिल कर ली है। यह उपलब्धि महज दो-ढाई साल के छोटे अंतराल में प्राप्त की गई है।
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सोलर रूफ टॉप में भी अव्वल
सोलर रूफ टॉप के मामले में भी राजस्थान ने अपनी धाक जमाई है। महानिदेशक खन्ना ने संतोष व्यक्त किया कि राजस्थान आज देश के उन शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है, जो सौर ऊर्जा उत्पादन में सबसे आगे चल रहे हैं।
"जिस गति के साथ प्रदेश में कुसुम प्लांट ग्रिड से जुड़ रहे हैं, इसे देखते हुए वर्ष के अंत तक इनकी कुल स्थापित क्षमता 10 हजार मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।" - आरती डोगरा, चेयरमैन, राजस्थान डिस्कॉम्स
भविष्य की तकनीक और सहयोग
अजमेर विद्युत वितरण निगम के ग्रिड डिजिटाइजेशन में ग्लोबल एनर्जी एलायंस फॉर पीपुल एंड प्लेनेट (जी ऐप) का सहयोग लिया जा रहा है। इससे बिजली वितरण प्रणाली को और अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।आरती डोगरा ने उम्मीद जताई कि इंटरनेशनल सोलर अलायंस से मिलने वाला तकनीकी सहयोग राजस्थान के एनर्जी एफिशिएंसी स्तर को बेहतर करेगा। इससे ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशन प्लानिंग की दिशा में आवश्यक तकनीकी मजबूती प्राप्त होगी।बैठक में जयपुर, जोधपुर और अजमेर डिस्कॉम के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सभी ने राजस्थान के मॉडल को भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए सबसे सटीक और टिकाऊ समाधान माना है।राजस्थान की यह सफलता न केवल राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगी। सौर ऊर्जा का यह बढ़ता ग्राफ प्रदेश की आर्थिक उन्नति के नए द्वार खोल रहा है।
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