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राजस्थान स्टार्टअप्स की नई उड़ान: विकसित राजस्थान @2047: स्टार्टअप्स बनेंगे विकास का आधार

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 17 मई 2026, 12:56 दोपहर
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जयपुर के भामाशाह टेक्नो हब में स्टार्टअप्स के नवाचारों को सराहा।

जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर अब न केवल अपने गौरवशाली इतिहास और किलों के लिए बल्कि अपनी आधुनिक तकनीक और तेजी से बढ़ती स्टार्टअप संस्कृति के लिए भी पहचानी जा रही है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने हाल ही में झालाना स्थित भामाशाह टेक्नो हब का दौरा किया।

इस दौरे के दौरान उन्होंने वहां संचालित हो रहे विभिन्न स्टार्टअप्स, इनक्यूबेशन सेंटर्स और वहां किए जा रहे नवाचारों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने युवाओं के जज्बे और उनके तकनीकी कौशल की जमकर सराहना की।

विकसित राजस्थान @2047 का विजन

मुख्य सचिव ने युवा आंत्रप्रेन्योर्स को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश एक बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। 'विकसित राजस्थान @2047' के निर्माण में तकनीक की भूमिका सबसे अहम होगी।

उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग द्वारा संचालित 'आईस्टार्ट' कार्यक्रम इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित होगा। यह कार्यक्रम युवाओं को न केवल मंच दे रहा है, बल्कि उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धी बना रहा है।

तकनीक, उत्कृष्टता और नेक्स्ट जनरेशन रिफॉर्म्स के माध्यम से राजस्थान अब देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। यह बदलाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा प्रदान करेगा।

"युवाओं की नवाचार क्षमता और तकनीकी दक्षता प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध होगी। आईस्टार्ट मॉडल ने प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को एक नई और मजबूत पहचान दी है।"

भामाशाह टेक्नो हब की आधुनिक सुविधाएं

मुख्य सचिव ने टेक्नो हब में उपलब्ध विश्वस्तरीय सुविधाओं का जायजा लिया। इसमें स्टार्टअप्स के लिए तैयार किए गए आधुनिक सीटिंग स्पेस और कॉन्फ्रेंस हॉल शामिल हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किए गए हैं।

उन्होंने वहां मौजूद टिंकरिंग लैब, स्लीपिंग पॉड्स और जिम्नेजियम जैसी सुविधाओं को देखा। ये सुविधाएं उद्यमियों को एक तनावमुक्त और रचनात्मक वातावरण प्रदान करने के लिए बनाई गई हैं, ताकि वे अपने विचारों पर काम कर सकें।

कैफेटेरिया और अन्य सहायक सेवाओं की जानकारी लेते हुए उन्होंने कहा कि एक बेहतर वर्किंग कल्चर ही स्टार्टअप्स की सफलता का आधार होता है। राज्य सरकार स्टार्टअप्स को हर संभव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

नवाचारों से रूबरू हुए मुख्य सचिव

दौरे के दौरान श्रीनिवास ने कई स्टार्टअप संस्थापकों से सीधा संवाद किया। उन्होंने 'Office Glider' जैसे परिवहन आधारित स्टार्टअप की कार्यप्रणाली को समझा, जो दैनिक आवागमन को सुगम बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

सस्टेनेबल फैशन पर आधारित 'CoasterBox' और परफॉर्मेंस मार्केटिंग के क्षेत्र में काम कर रहे 'Intent Metric' के नवाचारों ने भी उनका ध्यान खींचा। उन्होंने इन युवाओं के विजन और उनकी व्यावसायिक समझ की तारीफ की।

इसके अलावा, उन्होंने टिंकरिंग लैब में 3-डी प्रिंटिंग तकनीक का भी निरीक्षण किया। वहां राजस्थान नॉलेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरकेसीएल) के विद्यार्थियों से बात कर उनके अनुभवों और भविष्य की योजनाओं को साझा किया।

ई-प्लेटफॉर्म और डेटा सुरक्षा पर जोर

मुख्य सचिव ने कहा कि आज का समय डिजिटल क्रांति का है। अधिकांश सेवाएं अब फिजिकल प्लेटफॉर्म से ई-प्लेटफॉर्म की ओर स्थानांतरित हो रही हैं। यह बदलाव पारदर्शिता और गति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

उन्होंने जोर दिया कि डिजिटल माध्यम न केवल बेहतर प्राइवेसी सुनिश्चित करते हैं, बल्कि डेटा सुरक्षा के मामले में भी अधिक विश्वसनीय हैं। आईस्टार्ट इसी दिशा में राज्य सरकार का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।

STEM शिक्षा और भविष्य की चुनौतियां

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए उन्होंने STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथेमेटिक्स) शिक्षा को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। यह युवाओं की तकनीकी दक्षता बढ़ाने और उन्हें वैश्विक बाजार के लिए तैयार करने में मदद करेगा।

उन्होंने स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े विभागों के साथ लिंकेज बनाने और इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ अधिक से अधिक एंगेजमेंट के अवसर प्रदान करने की बात कही। इससे छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।

स्टार्टअप्स को अब क्यूरेट कर अगले स्तर तक ले जाने की आवश्यकता है। इससे वे न केवल आर्थिक विकास के इंजन बनेंगे, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और रोजगार सृजन के भी प्रभावी माध्यम बन सकेंगे।

आईस्टार्ट: राजस्थान का सफल मॉडल

सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के शासन सचिव डॉ. रवि कुमार सुरपुर ने बताया कि आईस्टार्ट के माध्यम से एक सशक्त भौतिक और संस्थागत वातावरण तैयार किया जा रहा है। यह स्टार्टअप्स के लिए सुरक्षा कवच है।

स्टार्टअप्स को उचित मेंटरशिप, मार्गदर्शन, नेटवर्किंग और वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे राजस्थान में एक मजबूत उद्यमिता इकोसिस्टम विकसित हुआ है, जो छोटे शहरों तक अपनी पहुंच बना रहा है।

विभाग के विशिष्ट सचिव हिमांशु गुप्ता ने जानकारी दी कि आईस्टार्ट कार्यक्रम 'हब एंड स्पोक' मॉडल पर आधारित है। वर्तमान में इससे 8 हजार से अधिक स्टार्टअप्स और 9 आईस्टार्ट नेस्ट जुड़े हुए हैं।

युवाओं से संवाद और समाधान

ओपन इंटरेक्शन सेशन के दौरान मुख्य सचिव ने 'Career Mitra', 'Femease', 'Swachh' और 'Kingdom of Chess' जैसे स्टार्टअप्स के प्रतिनिधियों से संवाद किया। उन्होंने उनकी चुनौतियों और आवश्यकताओं की विस्तृत जानकारी ली।

वेस्ट मैनेजमेंट और हैल्थटेक जैसे क्षेत्रों में हो रहे काम की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान में तकनीक आधारित उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार हर कदम पर युवाओं के साथ खड़ी है।

राजस्थान सरकार का यह प्रयास न केवल नए उद्यमियों को मंच दे रहा है, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान कर रहा है। आने वाले समय में राजस्थान वैश्विक स्टार्टअप मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाएगा।

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