कोटा | राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों और भविष्य की योजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। कोटा के नयापुरा स्थित सियाम ऑडिटोरियम में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मंत्री ने कोटा-बूंदी जिले के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार विद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
1.50 लाख शिक्षकों की भर्ती का लक्ष्य
मंत्री दिलावर ने बताया कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में रिक्त पदों को भरने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक लगभग 30 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और आने वाले समय में 1.50 लाख और शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। सरकार विद्यालयों के क्रमोन्नयन के साथ-साथ नए पदों के सृजन पर भी ध्यान दे रही है, ताकि किसी भी विद्यालय में शिक्षण कार्य बाधित न हो।
BLO ड्यूटी और वेतन पर सख्त निर्देश
विद्यालयों में बीएलओ (BLO) कार्य के कारण शिक्षण प्रभावित होने की शिकायतों पर मंत्री ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीएलओ कार्य के लिए अर्द्धदिवसीय समय ही निर्धारित है और इसके नाम पर पूरे दिन विद्यालय से गायब रहना स्वीकार्य नहीं होगा। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो शिक्षक चुनाव या बीएलओ कार्य का बहाना बनाकर विद्यालय नहीं आते, उनका वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए। ऐसे लापरवाह शिक्षकों की सूची तैयार कर जिला कलक्टर और एसडीएम के साथ साझा की जाएगी ताकि उन पर प्रशासनिक कार्रवाई हो सके।
खेल मैदान और पीटीआइ की भूमिका
शिक्षा मंत्री ने विद्यालयों के भौतिक विकास पर जोर देते हुए कहा कि खेल मैदानों पर किए गए सभी अतिक्रमण हटाए जाएंगे। जिन विद्यालयों में खेल मैदान उपलब्ध नहीं हैं, वहां नए मैदान विकसित करने के लिए भूमि चिह्नित की जाएगी। अब शारीरिक शिक्षकों (PTI) को भी सामान्य शिक्षकों की तरह प्रत्येक कक्षा में खेल गतिविधियों का एक अनिवार्य कालांश (Period) लेना होगा। विद्यार्थियों के खेल प्रदर्शन के आधार पर ही अब पीटीआइ की वार्षिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिससे खेलों के प्रति जवाबदेही बढ़ेगी।
नशा मुक्त विद्यालय और शिक्षकों की मर्यादा
मंत्री दिलावर ने कहा कि शिक्षक समाज का दर्पण होता है, इसलिए उनका आचरण मर्यादित होना अनिवार्य है। उन्होंने विभाग को नशा करने वाले शिक्षकों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं, हालांकि फिलहाल उन पर किसी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। तालेड़ा स्कूल का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां का पूरा स्टाफ नशामुक्त है और विद्यालय में गुटखा खाकर प्रवेश करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
विद्यार्थियों के नाम सुधारने की पहल
सरकार ने विद्यार्थियों के उन नामों को बदलने की भी योजना बनाई है जो सुनने में अनुचित या अपमानजनक लगते हैं। शिक्षकों को अभिभावकों से संवाद कर ऐसे नामों को सुधारने के लिए प्रेरित करने को कहा गया है। इसके लिए शिक्षा विभाग जल्द ही 3,000 सम्मानजनक और सुंदर नामों की एक सूची विद्यालयों को उपलब्ध कराएगा।
शिक्षा में तकनीक और नवाचार
संवाद के दौरान अर्जुनपुरा के प्रधानाचार्य गजेन्द्र गौतम द्वारा विकसित एआइ (AI) आधारित कोर्स की सराहना की गई। इन कोर्स के माध्यम से कक्षा 12वीं के छात्रों को भूगोल और अन्य विषयों की तैयारी कराई जा रही है। इसके अलावा, सुल्तानपुर के पीएमश्री विद्यालय द्वारा विद्यार्थियों को पर्यावरण टूर पर ले जाने की पहल को भी सराहा गया।
सामाजिक सहयोग और दान
शिक्षा के क्षेत्र में जनसहभागिता का उदाहरण पेश करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी रामचरण मीणा के परिवार ने बड़ी पहल की है। उन्होंने मुंगेना स्थित विद्यालय के लिए 25 लाख रुपए मूल्य की 2.25 बीघा भूमि और अन्य संसाधन दान में दिए हैं। मंत्री ने कहा कि ऐसे दानदाताओं के सहयोग से ही सरकारी विद्यालयों की स्थिति में व्यापक सुधार संभव है।