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राजस्थान विवि: बेटियों ने जीते गोल्ड: राजस्थान विवि दीक्षांत समारोह: बेटियों ने गाड़ा सफलता का झंडा

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 26 अप्रैल 2026, 11:07 दोपहर
उपराष्ट्रपति ने राजस्थान विवि में बेटियों की सफलता को सराहा और युवाओं को राष्ट्र निर्माण का मंत्र दिया।

जयपुर | राजस्थान विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने युवाओं को राष्ट्र का गौरव और भविष्य का निर्माता बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज का युवा केवल डिग्री धारक नहीं है, बल्कि वह विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने वाली सबसे बड़ी शक्ति है।

उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को देश के व्यापक लक्ष्यों के साथ जोड़ने की अपील की ताकि भारत आर्थिक महाशक्ति बन सके।

उपराष्ट्रपति ने युवाओं से नवाचार और अनुसंधान के माध्यम से देश के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया।

बेटियों ने फहराया सफलता का परचम

समारोह में सबसे खास बात यह रही कि विभिन्न पाठ्यक्रमों में वितरित किए गए कुल 250 स्वर्ण पदकों में से 197 पदक छात्राओं ने प्राप्त किए।

उपराष्ट्रपति ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह नारी शक्ति की बढ़ती ताकत और उनके अटूट संकल्प का जीवंत प्रमाण है।

उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए इसे महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में राष्ट्र का एक बड़ा और महत्वपूर्ण संकल्प बताया।

उनके अनुसार, महिलाएं देश की नींव हैं और समाज के सर्वांगीण विकास के लिए उनके सशक्तिकरण की दिशा में और अधिक प्रयास किए जाने चाहिए।

उन्होंने छात्राओं को इस स्प्रिट को आगे भी बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि वे समाज के हर क्षेत्र में नेतृत्व कर सकें।

आत्मनिर्भर भारत और नवाचार की राह

उपराष्ट्रपति ने राजस्थान विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक यात्रा का जिक्र किया और कहा कि यह संस्थान 1947 से ही समाज सेवा के लिए समर्पित रहा है।

उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हम केवल नौकरी मांगने वाले न रहकर रोजगार प्रदाता और उद्यमी बनें।

प्रधानमंत्री के विजन 'विकसित भारत@2047' को सफल बनाने के लिए युवाओं को इनोवेशन, आविष्कार और भारतीय ज्ञान परंपरा को नए आयाम देने होंगे।

उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रतिभा में जब मानवीयता और गरिमा का समावेश होता है, तभी एक संपूर्ण और प्रभावशाली व्यक्तित्व का निर्माण संभव होता है।

सहानुभूति के बिना उत्कृष्टता और विनम्रता के बिना कोई भी बड़ी उपलब्धि अधूरी मानी जाती है, इसलिए युवाओं को अपने संस्कारों को नहीं भूलना चाहिए।

उन्होंने युवाओं से अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी समान रूप से जागरूक रहने और समाज की भलाई में योगदान देने को कहा।

नशे की लत के खिलाफ कड़ा संदेश

राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने युवाओं के बीच बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की और इसे भविष्य के लिए खतरा बताया।

उन्होंने आगाह किया कि सीमा पार से नशीले पदार्थों को भेजकर भारत की युवा पीढ़ी को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है, जिसे विफल करना होगा।

राज्यपाल ने ड्रग्स को 'आग' की संज्ञा दी और कहा कि हर परिवार को अपने बच्चों को इस विनाशकारी लत से बचाने के लिए सतर्क रहना होगा।

उन्होंने विश्वविद्यालय के ध्येय वाक्य 'धर्मो विश्वस्य जगतः प्रतिष्ठा' की महत्ता बताते हुए कहा कि ईमानदारी और नैतिकता ही जीवन का असली आधार है।

उन्होंने भारत को एक समर्थ और शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं से अपनी ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग करने की अपील की।

शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व

उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने बाबा साहेब अंबेडकर को याद करते हुए शिक्षा को सबसे बड़ी शक्ति बताया और युवाओं से अनुशासित रहने को कहा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प में राजस्थान के युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होने वाली है, जिसे निष्ठा से निभाना होगा।

राज्यसभा सांसद राधामोहन अग्रवाल ने विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास को साझा किया और बताया कि इसकी आधारशिला प्रथम गवर्नर-जनरल ने रखी थी।

समारोह के अंत में राज्यपाल ने मेधावी छात्र-छात्राओं को डिग्रियां और पदक प्रदान किए, जिससे पूरे परिसर में भारी उत्साह और गर्व का माहौल रहा।

यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्रियां बांटने का उत्सव नहीं था, बल्कि युवाओं को राष्ट्र के प्रति उनके कर्तव्यों की याद दिलाने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव था।

शिक्षित और संस्कारित युवा ही आने वाले समय में राजस्थान और पूरे भारत को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का वास्तविक सामर्थ्य रखते हैं।

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