राजस्थान

राजस्थान के सरहदी गांवों की बदलेगी सूरत: राजस्थान के सीमावर्ती गांवों का होगा कायाकल्प: 184 गांवों में 4G और डिजिटल क्रांति

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 22 मई 2026, 12:14 दोपहर
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास कार्यों को दी मंजूरी।

जयपुर | राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए राज्य सरकार ने विकास का एक बड़ा द्वार खोल दिया है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में शासन सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग समिति की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के सीमा क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इससे सीमावर्ती समुदायों को बेहतर जीवन स्तर मिल सकेगा।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निकट रहने वाले लोगों के साथ विश्वास स्थापित करने और सकारात्मक संबंध विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके लिए सीमा क्षेत्रों में सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए गए।

डिजिटल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे पर जोर

मुख्य सचिव ने सीमावर्ती जिलों के कलेक्टरों द्वारा ऑप्टिकल फाइबर केबल के माध्यम से डिजिटल कनेक्टिविटी के प्रस्ताव भेजने की सराहना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में कनेक्टिविटी विकास की पहली सीढ़ी है।

दूरदर्शन और बीएसएनएल के अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया कि वे इन सुदूर क्षेत्रों में 4जी टेलीकॉम कनेक्टिविटी और टेलीविजन सिग्नल की उपलब्धता सुनिश्चित करें। इससे सीमावर्ती ग्रामीणों को सूचनाओं से जोड़ा जा सकेगा।

ग्रामीण विकास विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने बताया कि वाइब्रेंट विलेज योजना सीमांत क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम के बाद केंद्र की दूसरी सबसे बड़ी पहल है। यह सीमाओं के समग्र विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

"सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारा मुख्य लक्ष्य है। डिजिटल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा विकास से इन क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आएगा और सुरक्षा भी मजबूत होगी।" - मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास

मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम की शुरुआत

राज्य सरकार ने बजट 2025-26 के तहत मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम भी शुरू किया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से 5 सीमावर्ती जिलों के 1206 गांवों के विकास के लिए 150 करोड़ रुपये प्रति वर्ष खर्च होंगे।

वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के दूसरे चरण में जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर और फलौदी जिलों के 184 गांवों को चुना गया है। इन गांवों में 10 प्रमुख क्षेत्रों में सघन कार्य किए जाएंगे जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को बदल देंगे।

इन गांवों में हर मौसम के अनुकूल सड़कें, 4जी कनेक्टिविटी और ऑन-ग्रिड विद्युतीकरण को शत-प्रतिशत पूरा किया जाएगा। इसके साथ ही पर्यटन और संस्कृति के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि स्थानीय रोजगार बढ़ सके।

आजीविका सृजन और कौशल विकास पर फोकस

योजना का एक मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अवसंरचना के साथ-साथ आजीविका सृजन भी है। स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूत कर स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

बैठक में युवा मामले, खेल, गृह और स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिवों ने भी भाग लिया। उन्होंने अपने-अपने विभागों से संबंधित प्रस्तावित कार्यों की विस्तृत जानकारी समिति के समक्ष प्रस्तुत की।

समिति ने जिलों से प्रस्तावित 123 रणनीतिक गांवों के लिए 232.82 करोड़ रुपये के 515 कार्यों का अनुमोदन किया। प्रत्येक रणनीतिक गांव में 3 करोड़ रुपये तक के विकास कार्य करवाने की अनुमति दी गई है।

प्रशासनिक समन्वय और भविष्य की राह

इस मेगा प्रोजेक्ट में सार्वजनिक निर्माण, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास और पशुपालन जैसे 15 से अधिक विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़े।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अंततः, इन एकीकृत प्रयासों से राजस्थान के रेतीले धोरों में बसे सीमावर्ती गांवों की तस्वीर बदलेगी। बेहतर सुविधाओं से न केवल पलायन रुकेगा, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी ये क्षेत्र अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनकर उभरेंगे।

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